गुरुग्राम में स्वच्छ भारत मिशन के तहत मंडल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

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स्वच्छ सर्वेक्षण 2025–26 की नई टूलकिट और बदले मानकों पर अधिकारियों व कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण

गुरुग्राम, 21 फरवरी। स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) के अंतर्गत आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण 2025–26 की तैयारियों को लेकर गुरुग्राम के सेक्टर – 18 स्थित नगारो कॉम्प्लेक्स में मंडल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में गुरुग्राम, रोहतक और फरीदाबाद मंडलों के विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। आयोजन में नगारो तथा राहगीरी फाउंडेशन का विशेष सहयोग रहा।

कार्यशाला में स्वच्छ सर्वेक्षण की नई टूलकिट, मूल्यांकन प्रणाली तथा प्रमाणन मानकों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि इस बार सर्वेक्षण प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल, पारदर्शी, व्यवस्थित और परिणाम-केंद्रित बनाया गया है।

नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया, अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका तथा एसबीएम-अर्बन के हरियाणा स्टेट मिशन निदेशक शाश्वत सांगवान ने अधिकारियों को नई प्रणाली के अनुरूप तैयारी करने और स्वच्छता मानकों को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया।

स्वच्छ सर्वेक्षण की नई टूलकिट: बड़े बदलाव

कार्यशाला में बताया गया कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025–26 के लिए जारी नई टूलकिट में शहरों की रैंकिंग और प्रमाणन प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए गए हैं। मूल्यांकन को “सरल, सटीक, व्यवस्थित और समावेशी” बनाने के उद्देश्य से मानकों को पुनर्गठित किया गया है, ताकि शहरों की वास्तविक स्वच्छता स्थिति का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।

मूल्यांकन के लिए नए और संशोधित मानदंड

नई प्रणाली के तहत शहरों का आकलन अब 10 प्रमुख सेक्शनों में किया जाएगा। कुल 12,500 अंकों के आधार पर अंतिम रैंकिंग निर्धारित होगी। इन प्रमुख सेक्शनों में विजिबल क्लीनलीनेस, कचरे का पृथक्करण, संग्रह और परिवहन, ठोस कचरा प्रबंधन, स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता, प्रयुक्त जल प्रबंधन, मैकेनाइज्ड सफाई सेवाएं, स्वच्छता जागरूकता अभियान, संस्थागत मजबूती, सफाई कर्मियों का कल्याण तथा नागरिक फीडबैक एवं शिकायत निवारण शामिल हैं। नई व्यवस्था के तहत शहरों को उनकी आबादी के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिससे छोटे और बड़े शहरों के बीच निष्पक्ष तुलना संभव हो सके। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग पैरामीटर निर्धारित किए गए हैं।

नई टूलकिट में स्वच्छता प्रमाणन को अत्यधिक महत्व दिया गया है। ओडीएफ++ प्रमाणन के लिए 100% घरेलू शौचालय कवरेज, सभी सार्वजनिक शौचालय कार्यशील एवं मानकों के अनुरूप, सेप्टिक टैंक की नियमित सफाई व्यवस्था तथा मलजल का सुरक्षित निस्तारण एवं उपचार होना चाहिए। वहीं वाटर + प्रमाणन के लिए बिना उपचारित अपशिष्ट जल का जल स्रोतों में शून्य प्रवाह, अधिकतम घरों का सीवरेज नेटवर्क से जुड़ाव तथा उपचारित जल का पुनः उपयोग आदि शर्तें हैं। सर्वेक्वाषकन में वाटर+ को स्वच्छता का सर्वोच्च प्रमाणन माना गया है।

गलत डेटा देने पर लगेगा दंड

इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है। यदि किसी नगर निकाय द्वारा प्रस्तुत आंकड़े और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित संकेतक के अंक काटे जाएंगे। अतिरंजित या गलत जानकारी देने पर नकारात्मक अंक का प्रावधान भी किया गया है।

पर्यटन और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

नई टूलकिट में पर्यटन स्थलों, सार्वजनिक स्थलों और अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही स्कूल स्तर पर भी स्वच्छता मूल्यांकन शामिल किया गया है, ताकि बच्चों में प्रारंभ से ही स्वच्छता की आदत विकसित हो सके। फील्ड सर्वे मार्च 2026 में शुरू हो जाएगा।

स्वच्छता प्रतिस्पर्धा होगी और कड़ी

नई व्यवस्था के लागू होने से नगर निकायों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ने की संभावना है। पारदर्शी मूल्यांकन, सख्त मानक और नागरिक सहभागिता के कारण इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण को पहले से अधिक प्रभावी और विश्वसनीय माना जा रहा है। अधिकारियों से अपील की गई कि वे स्वच्छता को जन आंदोलन बनाकर शहरों को बेहतर रैंक दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025–26 केवल रैंकिंग प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि शहरों में स्थायी स्वच्छता व्यवस्था स्थापित करने का अवसर है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई टूलकिट के सभी मानकों को गंभीरता से समझते हुए जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि नागरिकों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

मिशन निदेशक शाश्वत सांगवान ने कहा कि स्वच्छता कार्यों में पारदर्शिता, नियमित मॉनिटरिंग और नागरिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक निस्तारण, सीवरेज प्रबंधन और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही सफाई कर्मियों के कल्याण और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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