राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव 2026 के वर्षपर्यंत सियासी मायने

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कमलेश पांडेय …………… वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

चिरंजीवी सदन ‘राज्यसभा’ के द्विवार्षिक चुनाव के लिए वर्ष 2026 में विभिन्न चरणों में खाली होने वाली कुल 71-75 सीटें के लिए चुनाव होंगे जो पूरे वर्ष अप्रैल और नवंबर में भरी जाएंगी। लिहाजा, इन चुनावों के राजनीतिक मायने गहन व अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव जहां एनडीए की बहुमत मजबूती बढ़ा सकते हैं, वहीं विपक्ष को भी कमजोर कर सकते हैं। इससे भाजपा व उसके साथियों का चुनावी हौसला बढ़ेगा।

जहां तक इनकी प्रमुख तारीखों की बात है तो चुनाव आयोग ने पहले चरण में 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव घोषित किए हैं। जिसके लिए अधिसूचना 26 फरवरी को जारी होगी, नामांकन 5 मार्च तक, और मतदान-मतगणना 16 मार्च 2026 को। जबकि बाकी सीटें नवंबर में भरी जाएंगी, जिसमें उत्तर प्रदेश की 10 सीटें सबसे महत्वपूर्ण हैं। इन दस चुनावी राज्यों में से 6 राज्यों में एनडीए की सरकार है, जबकि 4 राज्यों में इंडी गठबंधन के घटक दल सरकार में हैं। जहां तक राज्यवार सीटों की बात है कि पहले चरण में महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, पश्चिम बंगाल की 5, बिहार की 5, ओडिशा की 4, असम की 3, हरियाणा की 2 और छत्तीसगढ़ की 1 सीटें शामिल हैं, जबकि दूसरे चरण  में उत्तरप्रदेश की 10 और झारखंड, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना आदि की 20 से अधिक सीटों के लिए नवम्बर में चुनाव होंगे। 

जहां तक उच्च सदन राज्यसभा में वर्तमान दलगत स्थिति की बात है तो राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं, जहां भाजपा के 103 और एनडीए के 121-129 सांसद हैं। जबकि विपक्षी इंडिया (INDIA) ब्लॉक के पास 78-80 सीटें हैं, जिसमें कांग्रेस के 27 सांसद हैं। जहां तक इन चुनावों के राजनीतिक प्रभाव की बात है तो इन चुनावों में एनडीए को 7-9 या इससे अधिक सीटों का लाभ मिलने का अनुमान है, जिससे उनकी संख्या 145 तक पहुंच सकती है जबकि विपक्ष को 5 सीटें खोने का खतरा, खासकर बिहार, महाराष्ट्र में है। इससे भाजपा को राज्यसभा में अब कोई भी विधेयक पास करना आसान होगा और सुपरमेजॉरिटी की ओर बढ़त भी उसे मिलेगी।

सवाल है कि इन चुनावों में एनडीए को कितनी सीटें मिलने की संभावना है तो राजनीतिक विश्लेषकों को अनुमान है कि एनडीए को 2026 के राज्यसभा चुनावों में कुल 48 या इससे अधिक सीटें मिलने की संभावना है, जिससे उनकी ताकत 129 से बढ़कर 140+ हो सकती है। पहले चरण के 37 सीटों पर 5-7 का लाभ अनुमानित है, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे बाद के चरणों से भी उसे अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 71-75 खाली सीटों में से एनडीए को नेट 7-9 या 48 सीटें हासिल हो सकती हैं। चूंकि वर्तमान में एनडीए के 121-129 सदस्य हैं, इसलिए चुनाव बाद 145 तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं बाद के जून-नवम्बर वाले दूसरे चरणों के प्रभाव की बात है तो वे भी स्पष्ट है। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों में भाजपा को 7-8 मिलनी संभावित है, जबकि ओडिशा, तेलंगाना आदि में स्थिरतामिलेगी।, कुल मिलाकर सुपरमेजॉरिटी (123+) पक्की होगी। जबकि विपक्ष को 5 नुकसान होगा।

जहां तक इन चुनावों में इंडिया गठबंधन को कितनी सीटें मिलने की बात हैं तो इंडिया गठबंधन को 2026 के राज्यसभा चुनावों में कुल 71-75 सीटों में से नेट 5 का नुकसान हो सकता है, जिससे उनकी संख्या 80 से घटकर 75 रह जाएगी। पहले चरण के 37 सीटों पर भी नुकसान की स्थिति बनी हुई है, हालांकि कुछ राज्यों में स्थिरता संभव है। विश्लेषकों के अनुसार, इंडिया ब्लॉक वर्तमान 80 सीटों से 75 पर सिमट सकता है। कांग्रेस को विशेष रूप से 8 सीटें खोने का खतरा, जिसमें मल्लिकार्जुन खरगे, दिग्विजय सिंह की सीटें भी शामिल हैं। वहीं बाद के चरणों का प्रभाव

भी उसपर पड़ेगा। क्योंकि उत्तर प्रदेश की 10 सीटें में से सपा को 2-3 मिलनी संभावित हैं, लेकिन कुल नुकसान होगा। जबकि कर्नाटक, झारखंड में 1-1 सीटों का नुकसान संभव है। ओवरऑल, एनडीए के लाभ से इंडिया कमजोर होगा।

जहां तक राज्यवार स्थिति की बात है तो बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव होगा। अभी आरजेडी के 2, जेडीयू के 2 और एक सांसद राष्ट्रीय लोक मोर्चा का है। बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट पर जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। एनडीए के पास 202 विधायक हैं और एनडीए के खाते में 4 सीटें सुनिश्चित हैं, जबकि 5 के लिए जोर आजमाइश बढ़ेगी। क्योंकि यहां 35 सीटों के साथ I.N.D.I.A. एक भी सीट अपने बल पर जीतने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में 5 विधायकों वाले AIMIM की भूमिका अहम हो जाती है।

यदि पूरा विपक्ष एकजुट होता है तो बिहार में विपक्ष के पास कुल 41 विधायक हो जाते हैं और विपक्ष एक सीट निकाल सकते हैं। ऐसे में यह चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व और विपक्षी एकता की के लिए अग्निपरीक्षा होगा। 

वहीं महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व में सत्तारूढ़ महायुति आसानी से 6 सीटों पर जीत हासिल कर लेगा, वहीं 7वीं सीट के लिए वोटिंग हो सकती है। इसलिए

महाराष्ट्र की राजनीतिक के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार का संसदीय सफर थम सकता है। जबकि हरियाणा से बीजेपी के दो सदस्य किरण चौधरी और रामचंद्र जांगरा का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इसी प्रकार ओडिशा की 4 सीटों पर चुनाव होंगे, जहां अभी 2 सीट बीजेपी और 2 बीजेडी के पास है लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो बीजेपी की सीटों में इजाफा होना तय है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में दोनों सीटें अभी कांग्रेस के पास हैं और यहां भी बीजेपी जीत दर्ज करने की स्थिति में है। 

रही बात तेलंगाना की तो वहां से कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी रिटायर हो रहे हैं और बीआरएस के एक कैडिडेट का कार्यकाल पूरा हो रहा है। तेलंगाना में काग्रेस दोनों सीटें जीत सकती है और हिमाचल में भी काग्रेस एक सीट जीत सकती है। असम से तीन पश्चिम बंगाल से 5 और तमिलनाडु से भी 6 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होंगे। चूंकि इन तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इन राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियों के पास राज्यसभा में अपना संख्याबल कायम रखने का मौका मिलेगा।

यही वजह है कि क्रॉस वोटिंग से निपटने की चुनौती विपक्ष के सामने रहेगी। क्योंकि राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के लिए अपने अपने विधायको को एकजुट रखने की चुनौती हमेशा होती है। पिछले कुछ राज्यसभा चुनावों को देखें तो हरियाणा में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का सामना करना पड़ा था। इसलिए आने वाले राज्यसभा चुनावों को देखें तो चाहे हरियाणा हो, बिहार हो, यहां पर काग्रेस और सहयोगी दलों को फूंक-फूंक करकदम रखना होगा। हालांकि कुछ सीटों पर तो रिजल्ट पहले से ही तय है, लेकिन अगर विपक्ष क्रॉस वोटिंग को रोक पाता है तो उसके हाथ भी कुछ सीट आ सकतीहैं। चूंकि राज्यसभा में बीजेपी और एनडीए का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, इसलिए इस वर्ष 75 सीटों पर होने वाले चुनावों में विपक्ष यदि कारगर रणनीति नहीं बनाता है तो फिर इंडिया गठबंधन वाले कांग्रेस और उसके सहयोगियों की संख्या और घट सकती है, इतना तय है।

जहां तक इन चुनावों में प्रमुख नेताओं के प्रभावित होने की बात है तो कई दिग्गजों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है जिसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी ) के शरद पवार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, जदयू नेता हरिवंश, भाजपा के केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी (6 मंत्री सहित) शामिल हैं। वहीं बीएसपी राज्यसभा से साफ हो सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश में भाजपा को 7, सपा को 2 सीटें मिलने की संभावना है। वहीं राजद (RJD) और बीजद (BJD) समेत कई दलों की सीटें घटेगी।

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Author: Bharat Sarathi

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