Educrest इंटरनेशनल स्कूल पर FIR के बाद उठे बड़े सवाल

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समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) बोले – “अब पूरे गुरुग्राम के अवैध स्कूलों की हो उच्च स्तरीय जांच”

गुरुग्राम, 18 फरवरी 2026: सेक्टर-9B स्थित Educrest इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ सीबीएसई की फर्जी मान्यता दिखाकर धोखाधड़ी करने के आरोप में थाना सेक्टर-9A गुरुग्राम में एफआईआर दर्ज होने के बाद शहर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्जुन नगर के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि आखिरकार Educrest स्कूल मामले में एफआईआर दर्ज हो गई और पुलिस ने भी इसकी पुष्टि कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि गुरुग्राम में अब भी कितने ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं जो बिना मान्यता के बच्चों का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं?

“सिर्फ आठवीं तक मान्यता, पढ़ा रहे दसवीं-बारहवीं”

गुरिंदरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि शहर में अनेक ऐसे निजी स्कूल चल रहे हैं जिन्हें केवल आठवीं तक की मान्यता प्राप्त है, लेकिन वे बड़ी-बड़ी कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। परीक्षा के समय बच्चों को दूसरे स्कूलों के माध्यम से पेपर दिलवाए जाते हैं और कागजों में दाखिले कहीं और दिखाए जाते हैं।

उन्होंने इसे “डमी स्कूल” और “डमी क्लासेस” का गंभीर खेल बताते हुए कहा कि यह शिक्षा प्रणाली के साथ खुला मज़ाक है।

“जो बच्चे पूरे साल नियमित स्कूल जाते हैं, उनके साथ भी यह अन्याय है। और जो पैसे देकर केवल परीक्षा देने आते हैं, वह भी एक तरह की शैक्षणिक धोखाधड़ी है।”

“शिक्षा सेवा का केंद्र है, व्यापार की मंडी नहीं”

गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि स्कूल और शिक्षा संस्थान सेवा का केंद्र होते हैं, न कि व्यापार की मंडी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूलों ने शिक्षा को पूरी तरह व्यवसाय बना दिया है और ट्यूशन फीस के अलावा –

  • बिल्डिंग फंड
  • लैब फंड
  • कंप्यूटर फंड
  • डेवलपमेंट फंड
  • ट्रांसपोर्टेशन फीस
  • कल्चरल एक्टिविटी फंड
  • स्कूल में किताबें बेचने

जैसे अनेक मदों में परिजनों से भारी रकम वसूली जा रही है, जबकि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

बिना फायर NOC के स्कूल – हादसे का जिम्मेदार कौन?

गुरिंदरजीत सिंह ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि गुरुग्राम में कई स्कूल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं।

“यदि कल किसी स्कूल में कोई हादसा हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? जिन स्कूलों के पास फायर एनओसी नहीं है, उन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

उन्होंने मांग की कि स्कूल भवनों की जांच की जाए कि क्या वे फायर सेफ्टी मानकों के अनुरूप बने हैं और क्या संबंधित विभागों से उनकी स्वीकृति ली गई है या नहीं।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

उन्होंने कहा कि यह कोई छोटा मामला नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। पूरे गुरुग्राम में विशेष अभियान चलाकर ऐसे स्कूलों को चिन्हित किया जाए:

  • जो बिना मान्यता के चल रहे हैं
  • जिनके पास दसवीं/बारहवीं की मान्यता नहीं है
  • जो डमी दाखिलों के जरिए परीक्षा दिलवाते हैं
  • जिनके पास फायर एनओसी या आवश्यक पंजीकरण नहीं है

उन्होंने यह भी मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि यह सामने आ सके कि ऐसे स्कूलों को संरक्षण कौन दे रहा है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपील

गुरिंदरजीत सिंह ने गुड़गांव शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से अपील की कि वे तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में कोई भी संस्था अभिभावकों को गुमराह न कर सके और बच्चों का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो।

उन्होंने कहा, “बच्चों का भविष्य किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। जो भी दोषी होगा, उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”

यह मामला अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे शहर की निजी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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