70 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्गों को मिले पेंशन का कानूनी अधिकार: वेदप्रकाश विद्रोही

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बजट सत्र में कानून बनाकर ‘बुजुर्ग सम्मान भत्ता’ को बनाया जाए वास्तविक सम्मान, दया नहीं

चंडीगढ़/रेवाडी, 19 फरवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मांग की है कि हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में कानून बनाकर राज्य के 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों को पेंशन का कानूनी अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन का नाम भले ही भाजपा सरकार ने “बुजुर्ग सम्मान भत्ता” कर दिया हो, लेकिन इसे देने की प्रक्रिया में सम्मान की भावना नजर नहीं आती।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि सरकार मनमानी शर्तें थोपकर बुजुर्गों की पेंशन काटने और उन्हें अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि विश्व के कई देशों में बुजुर्गों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा दी जाती है, लेकिन भारत में इस दिशा में वह गंभीरता और संवेदनशीलता नहीं दिखाई देती।

उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार व्यवस्था के टूटने और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण आज अनेक बुजुर्ग सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में सरकार का दायित्व और बढ़ जाता है कि वह बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे।

विद्रोही ने स्मरण कराया कि वर्ष 1987 में चौधरी देवीलाल ने बिना किसी शर्त के सभी बुजुर्गों को 100 रुपये मासिक पेंशन देकर हरियाणा में एक ऐतिहासिक शुरुआत की थी। उस समय यह योजना सम्मान की भावना के साथ लागू की गई थी, लेकिन समय के साथ उस मूल भावना का क्षरण हो गया।

उन्होंने सुझाव दिया कि “बुजुर्ग सम्मान भत्ता” को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

  • 60 से 70 वर्ष आयु वर्ग के लिए वर्तमान शर्तों के अनुसार पेंशन जारी रखी जाए।
  • 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों को बिना शर्त सम्मान भत्ता अनिवार्य रूप से दिया जाए।

विद्रोही ने यह भी प्रस्ताव रखा कि जिन बुजुर्गों के बच्चे प्रथम या द्वितीय श्रेणी के अधिकारी हैं या जिनकी वार्षिक आय 20 लाख रुपये से अधिक है, उनके लिए यह नियम बनाया जा सकता है कि ऐसे पुत्र अपने माता-पिता के बैंक खाते में सरकार द्वारा निर्धारित सम्मान भत्ता प्रतिमाह अनिवार्य रूप से जमा करवाएं। वहीं अन्य सभी परिवारों के 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को हरियाणा सरकार बिना किसी शर्त के पेंशन प्रदान करे।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कानून बनता है तो बुजुर्गों का सम्मान भी कायम रहेगा और बुढ़ापा पेंशन को लेकर चल रहा विवाद भी समाप्त हो जाएगा।

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Author: Bharat Sarathi

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