महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में सस्पेंशन का संग्राम

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VC की मीटिंग पर सरकार की रोक, रजिस्ट्रार व प्रोफेसर निलंबित; दो दिन बाद VC का कार्यकाल समाप्त

रोहतक, 18 फरवरी। रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक को लेकर बड़ा प्रशासनिक टकराव सामने आया है। विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. राजबीर सिंह ने 17 फरवरी को रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकांत और कंप्यूटर साइंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

यह कार्रवाई उस समय हुई जब उच्चतर शिक्षा विभाग ने 18 फरवरी को प्रस्तावित EC बैठक को गैरकानूनी बताते हुए अगले आदेश तक स्थगित करने के निर्देश जारी किए थे। उल्लेखनीय है कि प्रो. राजबीर सिंह का कार्यकाल 20 फरवरी को समाप्त हो रहा है।

सरकार ने बैठक को बताया ‘गैरकानूनी’

उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने 17 फरवरी को VC और रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि 18 फरवरी को प्रस्तावित 304वीं कार्यकारी परिषद की बैठक न की जाए।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि 14 जनवरी 2026 को 302वीं EC बैठक को स्थगित करने के आदेश दिए गए थे, बावजूद इसके बैठक आयोजित की गई। विभाग ने साफ किया कि 302वीं बैठक में लिए गए किसी भी निर्णय को सरकार की मंजूरी नहीं मिलेगी।

सरकार का आरोप है कि 304वीं बैठक में 302वीं बैठक के निर्णयों को वैध ठहराने का प्रस्ताव रखा जाना था, जो आदेशों की अवहेलना होती।

VC बनाम रजिस्ट्रार: आदेशों की टकराहट

सरकारी निर्देश मिलने के बाद रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकांत ने पत्र जारी कर अधिकारियों को 18 फरवरी की बैठक में शामिल न होने के निर्देश दिए।

इसके तुरंत बाद VC ने रजिस्ट्रार को निलंबित करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने वाइस चांसलर के आदेशों की अवहेलना की, जो विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 9-C(2) का उल्लंघन है।

निलंबन आदेश में कहा गया कि रजिस्ट्रार के इस कदम से विश्वविद्यालय में असामान्य स्थिति उत्पन्न हुई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए।

प्रो. गिल भी निलंबित

कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल को भी अनुशासनहीनता और कार्यकारी परिषद के निर्णयों के अनुपालन में बाधा डालने के आरोप में सस्पेंड किया गया है। आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने और अंतिम निर्णय आने तक निलंबन प्रभावी रहेगा।

नियुक्तियों को लेकर बढ़ा विवाद

सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर होने वाली नियुक्तियां हैं। बताया जा रहा है कि कार्यकाल समाप्ति से पूर्व VC कुछ भर्तियों को अंतिम रूप देना चाहते थे।

EC की बैठक के विरोध में कई प्रोफेसर और कर्मचारी VC कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। डीन एकेडमिक प्रो. सुरेश सिंह मलिक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

क्या है कार्यकारी परिषद (EC)?

कार्यकारी परिषद विश्वविद्यालय की सर्वोच्च कार्यकारी इकाई होती है।

  • विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार।
  • प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर सहित अन्य शिक्षकों की नियुक्ति की शक्ति।
  • गेस्ट, मानद और प्रैक्टिस प्रोफेसरों की नियुक्ति तथा उनकी सेवा शर्तें तय करना।
  • परिषद की अध्यक्षता वाइस चांसलर करते हैं, जबकि रजिस्ट्रार इसका सचिव होता है।
  • वर्ष में कम से कम चार बैठकें अनिवार्य हैं।

दो दिन पहले सस्पेंशन, दो दिन बाद रिटायरमेंट

पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और कानूनी टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच यह विवाद किस दिशा में जाएगा, खासकर तब जब VC का कार्यकाल समाप्त होने में महज दो दिन शेष हैं।

MDU का यह विवाद आने वाले दिनों में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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