कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस के खिलाफ दर्ज मुकदमा तुरंत वापस ले सरकार, एसडीएम का हो तबादला : दीपेन्द्र हुड्डा

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·        जनसमस्या लेकर एसडीएम कार्यालय गए विधायक के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप में FIR दर्ज कराना निन्दनीय – दीपेन्द्र हुड्डा  

·        हम विपक्ष की आवाज दबने नहीं देंगे, हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे– दीपेन्द्र हुड्डा   

चंडीगढ़, 17 फरवरी। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने गुहला चीका से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने पर गहरी नाराजगी जताते हुए मांग करी कि कांग्रेस विधायक देवेन्द्र हंस व अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमा तुरंत वापस लिया जाए और जनप्रतिनिधि की बात न सुनने वाले एसडीएम का तुरंत ट्रान्सफर किया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित में उठाई गई विपक्ष की आवाज़ को सत्ता के जोर पर दबाया नहीं जा सकता। हम विपक्ष की आवाज दबने नहीं देंगे, हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।  

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि गुहला चीका से कांग्रेस विधायक देवेन्द्र हंस बीडीपीओ चीका परिसर में दुकानों के निर्माण से संबंधित मामले में लोकतांत्रिक ढंग से जनप्रतिनिधि का फर्ज निभाते हुए एसडीएम कार्यालय में अपनी बात कह रहे थे। लेकिन एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह ने न तो उनकी बात को गंभीरता सुना न ही मामले में सकारात्मक समाधान का कोई रास्ता निकालने का प्रयास किया। उलटे एक चुने हुए जनप्रतिनिधि से बहस की और विधायक व उनके साथ गए लोगों पर मानहानि, धमकी देने और सरकारी काम में बाधा डालने के मनगढ़ंत आरोप में FIR दर्ज करा दी। जिसमें एक पत्रकार भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा विधायक का फोन तक नहीं उठाया जा रहा था, जिसके कारण उन्हें जनता की समस्याओं को लेकर स्वयं मौके पर जाना पड़ा। जनप्रतिनिधि यदि जनता के मुद्दों को उठाते हैं या अधिकारियों से जवाबदेही मांगते हैं, तो उसे अपराध की तरह पेश करना स्वस्थ लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है। भारतीय लोकतंत्र में विधायिका और कार्यपालिका शासन की दो प्रमुख संस्थाएँ हैं। दोनों मिलकर लोकतंत्र को संचालित करती हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासनिक अधिकारी जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की बजाय राजनीतिक दल के एजेंट के रूप में कार्य करने लगें।

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Author: Bharat Sarathi

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