CBSE से मान्यता नहीं, फिर भी 10वीं-12वीं की कक्षाएं संचालित; रोल नंबर न मिलने से छात्र बोर्ड परीक्षा से वंचित
सेक्टर-9 स्थित Educrest इंटरनेशनल स्कूल पर गंभीर आरोप, अभिभावक पहुंचे पुलिस कमिश्नर कार्यालय

गुरुग्राम। सेक्टर-9 स्थित Educrest International School पर शिक्षा के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने खुद को Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) से एफिलिएटेड बताकर बच्चों का दाखिला लिया, जबकि वास्तविकता में स्कूल को केवल 8वीं कक्षा तक की मान्यता प्राप्त है। इसके बावजूद यहां 10वीं और 12वीं की कक्षाएं चलाई जा रही थीं।
सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब बोर्ड परीक्षा के लिए 11 छात्रों को रोल नंबर ही जारी नहीं किए गए। रोल नंबर न मिलने के कारण ये छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। परिजनों का आरोप है कि परीक्षा केंद्र पलवल के एक स्कूल में निर्धारित किया गया था, लेकिन एडमिट कार्ड और रोल नंबर की प्रक्रिया के दौरान इन बच्चों को सूची से बाहर कर दिया गया।
पुलिस पर भी उठे सवाल
पीड़ित अभिभावक पहले स्थानीय थाने पहुंचे, लेकिन कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए वे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
बिना एफिलिएशन और फायर NOC कैसे चल रहा स्कूल?
मामले में समाजसेवी गुरिंदरजीत सिंह ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2025-26 में माननीय हाईकोर्ट द्वारा गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, फिर भी गुरुग्राम में ऐसे स्कूल कैसे संचालित हो रहे हैं? उन्होंने दावा किया कि जिले में कई स्कूल बिना एफिलिएशन और बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि यदि बच्चों का पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन से तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र के साथ ऐसा अन्याय न हो।
सदमे में परिवार, न्याय की गुहार
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने स्कूल पर भरोसा कर अपने बच्चों का दाखिला कराया था, लेकिन अब उनका साल बर्बाद हो गया। बच्चों में मानसिक तनाव है और अभिभावक गहरे सदमे में हैं। उन्होंने दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है।
यह मामला गुरुग्राम में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस कथित शिक्षा घोटाले पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।






