गुरुग्राम में बढ़ता ट्रैफिक जाम: समाधान की सख्त जरूरत — इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

गुरुग्राम की सड़कों पर कब्ज़ा, जाम से त्रस्त जनता को कब मिलेगी राहत? — गुरिंदरजीत सिंह

स्कूल–हॉस्पिटल, बड़े शो रूम, और संस्थानों की सड़क पर पार्किंग से बिगड़ी व्यवस्था, समान कानून लागू हो — गुरिंदरजीत सिंह

गुरुग्राम। शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम को लेकर समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि गुरुग्राम की सड़कों पर जाम अब आम समस्या बन चुकी है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आ रहे।

इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि आम जनता यदि सड़क किनारे वाहन खड़ा कर दे तो तुरंत चालान काट दिया जाता है या गाड़ी उठा ली जाती है। इसी तरह रेहड़ी-पटरी वालों को भी हटाया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि जब रसूखदार, बड़े शो-रूम, निजी स्कूल और अस्पताल सड़क को ही पार्किंग में बदल देते हैं, तब कार्रवाई क्यों नहीं होती?

उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर प्रतिष्ठानों द्वारा सड़क की सीमाएं तक तोड़ दी जाती हैं, वाहनों को सड़क पर खड़ा कराया जाता है, जिससे मार्ग संकरा हो जाता है और घंटों जाम लगा रहता है। इससे आम नागरिकों का समय, ईंधन और धन तीनों बर्बाद होते हैं।

इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि यह दोहरी नीति क्यों? क्या कानून केवल आम नागरिकों के लिए है? यदि सड़कों से रेहड़ियां हट सकती हैं और आम लोगों की गाड़ियां उठाई जा सकती हैं, तो फिर बड़े प्रतिष्ठानों पर समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

उन्होंने शासन-प्रशासन से प्रश्न किया कि आखिर गुरुग्राम की जनता को जाम से कब राहत मिलेगी? क्या शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस और निष्पक्ष अभियान चलाया जाएगा?

उन्होंने मांग की कि:

  • सड़क पर अवैध पार्किंग करने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर बिना भेदभाव कार्रवाई हो।
  • निजी संस्थानों को अपनी पार्किंग व्यवस्था अनिवार्य रूप से परिसर के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं।
  • ट्रैफिक पुलिस व नगर निगम संयुक्त रूप से नियमित निरीक्षण अभियान चलाएं।
  • जाम प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन योजना लागू की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए तो नागरिकों के साथ मिलकर जनहित में आवाज़ बुलंद की जाएगी।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें