एपस्टीन फाइल्स : फिर सामने आया भोगवाद का शैतानी चेहरा, आ अब लौट चलें  

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ज्ञान चंद पाटनी   

एपस्टीन फाइल्स ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। इससे जुड़ी जो सामग्री सामने आ रही है, वह शैतानी कृत्यों को भी मात दे रही है। इससे स्पष्ट है कि अत्यधिक भोगवादी जीवनशैली इंसान को शैतान में बदल सकती है। इसका अंधानुकरण करने वालों को अब संभल जाना चाहिए और भारतीय जीवनशैली के मूल्यों का सम्मान करते हुए उनकी ओर लौटना चाहिए। अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेज, भयावह तस्वीरें और वीडियो न केवल उच्चपदस्थ नेताओं, अरबपतियों और राजघरानों के काले कारनामों को उजागर करते हैं बल्कि उस भोगवादी मानसिकता को बेनकाब करते हैं जो इंसान को शैतान बना देती है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से लेकर पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, एलन मस्क से लेकर प्रिंस एंड्र्यू तक के नाम एपस्टीन फाइल्स में आए हैं।

जेफ्री एपस्टीन इक्कीसवीं सदी का सबसे बड़ा दरिंदा था। उसका अपना लिटिल सेंट जेम्स द्वीप था जहां वह दुनिया भर के बड़े—बड़े लोगों को लाता था। वहां बच्चियों के साथ दरिंदगी होती थी। उसके पास अपना प्राइवेट जेट और हेलिकॉप्टर तक था। बच्चियों के साथ क्रूरता, ब्लैकमेल का तंत्र और एलीट क्लब का यह भयावह सच शैतानी षड्यंत्रों को भी पीछे छोड़ देता है। इस मामले पर सोच विचार करें तो यह केवल व्यक्तिगत पतन की नहीं बल्कि भोगवादी जीवनशैली के कारण शक्तिशाली लोगों के राक्षस में तब्दील होने की डरावनी कहानी है। असीमित भोग और धन-लिप्सा के कारण हो रहे नैतिक पतन और दुष्कत्यों से मानवता कराह रही है। भारत जैसे आध्यात्मिक समाज ने तो भोगवाद को बहुत पहले ही नकार दिया था, लेकिन धीरे—धीरे यहां भी इसके प्रति आकर्षण बढ़ा है। अब   अपने मूलभूत जीवन-मूल्यों की ओर लौटना होगा, यानी वे मूल्य जो संयम, करुणा और आत्म-नियंत्रण सिखाते हों। धनी—प्रभावशाली लोगों को भी इन मूल्यों के प्रति आस्था और विश्वास मजबूत करना होगा, लेकिन पाखंड से बचना होगा। 

एपस्टीन फाइल्स ने साबित कर दिया कि भोगवाद इंसान को पशु से भी निचले स्तर तक धकेल देता है। स्वतंत्रता का नाम लेकर असीमित सेक्स, ड्रग्स और धन का पीछा करने वाला समाज ऐसी अंधेरी सुरंग में चला जाता है जहां शैतानी कृत्य करने में भी उसे झिझक महसूस नहीं होती। भोगवाद एक ऐसी विचारधारा है जो भौतिक सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य और इंद्रिय सुख को ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य और सर्वोच्च सुख मानती है। इसमें वस्तुओं के उपभोग और स्वामित्व को ही खुशी का पैमाना मान लिया जाता है।  मौज-मस्ती को ही जीवन का लक्ष्य मानकर प्रकृति को केवल भोग का साधन समझा जाता है। एपस्टीन प्रकरण से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि भोगवाद शैतानी भूख पैदा करता है। वहां न कोई पारिवारिक बंधन है, न सामाजिक मर्यादा।  जो भारतीय पश्चिमी जीवनशैली के चलते भोगवादी जीवनशैली को अपना रहे हैं, उनके लिए यह चेतावनी है।   

गौरतलब है कि रोमन साम्राज्य के पतन में भी भोगवाद ने भूमिका निभाई थी। विलासी जीवन के चलते भारत के भी कई राजा—महाराजाओं के पतन के किस्से इतिहास में दर्ज हैं। आधुनिक काल में 1960 का ‘हिप्पी आंदोलन’ सेक्स-क्रांति का प्रतीक बना, लेकिन इसके नतीजे खतरनाक निकले। यौन स्वच्छंदता ने यौन-शोषण, बीमारियों और अपराधों में इजाफा किया। एपस्टीन फाइल्स उजागर होने से धनवानों के ऐसे गुप्त क्लब का पता चला जहां शैतानी कारनामों को अंजाम दिया गया।  जब जीवन में कोई संयम नहीं, कोई मर्यादा नहीं तो हर तरह के कुकृत्य करने की राह खुल जाती है। भारत का सौभाग्य रहा कि हमारी संस्कृति भोग नहीं, संयम सिखाती है  लेकिन, वैश्वीकरण ने भोगवाद के प्रति आकर्षण को तेज कर दिया और भारतीय जीवन मूल्यों के प्रति अनास्था पैदा कर दी। एपस्टीन फाइल्स चेतावनी है कि यह रास्ता शैतान की अंधेरी दुनिया तक जाता है।  

भारतीय जीवनशैली भोगवाद के ठीक विपरीत है।  हिंदू धर्म में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम की व्यवस्था के जरिए भोग को नियंत्रित किया गया था। परिवार-केंद्रित समाज, गुरु-शिष्य परंपरा और सामूहिकता ने हमें मजबूत बनाया। 

रामायण और महाभारत में अत्यधिक भोग के परिणाम दिखाए गए। रावण अत्यधिक भोग के कारण ही नष्ट हुआ और कौरवों का पतन भी अति लिप्सा के कारण हुआ। 

गौतम बुद्ध ने भी भोगवाद को दुःख का मूल बताया था। राजकुमार के रूप में भोग-सुख भोगे, किंतु उन्हें क्षणभंगुर पाया। उनका मानना था कि अत्यधिक भोग तृष्णा को बढ़ाता है और तृष्णा दुख का कारण है। बौद्ध धर्म ने भोगी राजाओं को संयम का पाठ सिखाया था। भगवान महावीर ने मानव को संयम और अहिंसा युक्त जीवन का मार्ग अपनाने की सलाह दी थी। जैन धर्म भोगवाद का कट्टर विरोधी है और भोग को कर्म-बंधन का मूल कारण माना गया है। महावीर स्वामी ने भोग-लिप्सा को दुःख का जनक बताया। पंच महाव्रत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह भोग को नियंत्रित करने के मार्ग हैं। इसी तरह  गुरु ग्रंथ साहिब में भोगवाद को पंच चोर (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार) का मूल माना गया है। इस्लाम और ईसाई धर्म में भी भोग को नियंत्रित करने की बात कही गई है। अतिभोग को पाप का कारण माना गया है। इसके बावजूद भोगवाद को बढ़ावा दिया गया जो पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। पर्यावरण तो तहस—नहस हो ही रहा है, नैतिकता रसातल में जा रही है, अपराध बढ़ रहे हैं और शैतानी मानसिकता विकसित हो रही है। एपस्टीन कांड इसका प्रमाण है। इसलिए भारतीय जीवन मूल्यों की ओर लौटना अब जरूरी हो गया है।   

भारतीय भी भोगवाद के जाल में फंस रहे हैं, वे भारत के आधारभूत जीवन मूल्यों से विमुख हो रहे हैं। युवतियां ‘आजादी’ के नाम पर असुरक्षित हो रही हैं, तो युवक भी अपराध की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। एपस्टीन फाइल्स दिखाती हैं कि यह ‘आजादी’ शोषण का जाल है। यह बात समझनी होगी कि अत्यधिक भोग व्यक्ति को शैतान बनाता है। संयम का मार्ग अपनाकर व्यक्ति भले ही देवता न बन पाए, लेकिन मानवीय मूल्यों से भरा हुआ इंसान जरूर बन सकता है। एपस्टीन कांड वैश्विक चेतावनी है। स्पष्ट है कि भारतीय जीवनशैली और जीवन मूल्य पूरी दुनिया को रास्ता दिखा सकते हैं। सबसे पहले भारतीय नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे खुद संयम, करुणा और आत्म-नियंत्रण से सुखी समाज बनाएं और दुनिया के सामने आदर्श पेश करें। भारतीय मूल्यों के प्रति आस्था बनाएं रखें।

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Author: Bharat Sarathi

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