-हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी यह स्पष्ट किया है कि घग्गर का पानी पीने योग्य नहीं है
-लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है
नई दिल्ली/सिरसा, 13 फरवरी। सिरसा से कांग्रेस सांसद एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने आज लोकसभा के शून्यकाल में हरियाणा के सिरसा संसदीय क्षेत्र, विशेषकर घग्गर नदी के किनारे बसे गांवों में बढ़ते कैंसर और जलजनित बीमारियों की चिंताजनक स्थिति का मुद्दा सदन के पटल पर रखा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय किसी प्रकार की अफवाह या अनुमान पर आधारित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दिए गए आधिकारिक उत्तरों से प्रमाणित तथ्य हैं। लोकसभा प्रश्न संख्या 4760 (दिनांक 28 मार्च 2025) के उत्तर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार घग्गर नदी का पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। इसी प्रकार प्रश्न संख्या 3413 (दिनांक 8 अगस्त 2025) के उत्तर में यह बताया गया कि हरियाणा में वर्ष 2019 से 2023 के बीच कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी यह स्पष्ट किया है कि घग्गर का पानी पीने योग्य नहीं है।
कुमारी सैलजा ने सदन को अवगत कराया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए अध्ययन में यह सामने आया है कि घग्गर नदी के किनारे रहने वाले लोगों में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का जोखिम अधिक है, क्योंकि जल में लेड, आयरन और एल्युमिनियम जैसे तत्व निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सिरसा संसदीय क्षेत्र के अनेक गांव आज भी भाखड़ा नहर आधारित स्वच्छ पेयजल आपूर्ति से वंचित हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि घग्गर का प्रदूषित पानी कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बनता जा रहा है।
कुमारी सैलजा ने सरकार से प्रश्न किया कि जब सरकार स्वयं यह स्वीकार कर चुकी है कि घग्गर का पानी पीने योग्य नहीं है, तो प्रभावित गांवों में सुरक्षित और वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था अब तक क्यों सुनिश्चित नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में आज भी दूषित भूजल की आपूर्ति हो रही है, वहाँ के लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि घग्गर बेल्ट में राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर का कैंसर सुपर स्पेशलिटी केंद्र स्थापित किया जाए, सभी प्रभावित गांवों को समयबद्ध तरीके से भाखड़ा नहर आधारित स्वच्छ पेयजल योजना से जोड़ा जाए। अधूरी नहरी जल परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए, विशेष स्वास्थ्य सर्वे और कैंसर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाए तथा घग्गर नदी में औद्योगिक अपशिष्ट एवं रासायनिक प्रदूषण पर कड़ा नियंत्रण और निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए। अंत में उन्होंने कहा कि यह केवल जल या पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और आने वाली पीढिय़ों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।








