केंद्रीय बजट 2025-26 में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और आय सुरक्षा की अनदेखी
गुरुग्राम। संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन गुरुग्राम के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने केंद्रीय बजट 2025-26 को किसान-मज़दूर और ग्रामीण भारत के लिए निराशाजनक बताते हुए कहा कि यह बजट देश के करोड़ों किसानों और ग्रामीण मजदूरों की बुनियादी समस्याओं को हल करने में पूरी तरह विफल रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सहित पूरे देश के किसान आज भी आय सुरक्षा, लागत आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और स्थायी कृषि समाधान जैसी मूलभूत मांगों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन आज पेश किए गए बजट में इन मुद्दों पर कोई ठोस, स्पष्ट और तत्काल राहत देने वाली घोषणा नहीं की गई।
चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिए जिन योजनाओं का उल्लेख किया गया है, वे या तो पहले से घोषित योजनाओं की पुनरावृत्ति हैं या फिर अत्यंत सीमित दायरे वाली पहलें हैं, जिनसे किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।कई कृषि बजट घोषणाएँ अभी भी “कागज़ पर” हैं।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागत का डेढ़ गुना मूल्य, तथा सभी फसलों की व्यापक सरकारी खरीद को लेकर बजट में कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाई नहीं देती। इससे किसानों की आय में स्थिरता और भरोसे के बजाय अनिश्चितता और बढ़ेगी।
ग्रामीण रोजगार और बेरोजगारी के सवाल पर भी बजट को निराशाजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी में ठोस बढ़ोतरी, मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा (पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा) तथा ग्रामीण युवाओं के लिए स्थायी रोजगार सृजन की कोई ठोस दिशा बजट में नजर नहीं आती। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी पहले से ही गंभीर समस्या बनी हुई है और यह बजट उसे और गहरा कर सकता है।
चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट केवल आंकड़ों और घोषणाओं का संग्रह है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। देश के अन्नदाता किसान और मेहनतकश मजदूर वर्ग की अपेक्षाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी फसलों पर लागत आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी तत्काल लागू की जाए। किसानों के कर्ज पर व्यापक राहत पैकेज घोषित किया जाए। ग्रामीण रोजगार योजनाओं को मजबूत कर न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की जाए और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा कृषि को जलवायु-अनुकूल, लाभकारी और स्थायी बनाने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जाएं।







