बजट 2026 जनता की बदहाली से आंख मूंदने वाला ‘स्व-प्रशंसा पत्र’ : प्रभाष घोष

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने बजट को बताया उपदेशों का पुलिंदा, कॉरपोरेटपरस्त और जनविरोधी

गुड़गांव | 02 फरवरी 2026 – केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वार्षिक बजट 2026 को एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने सिरे से खारिज करते हुए इसे देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति से कोसों दूर बताया है। पार्टी के महासचिव श्री प्रभाष घोष ने बजट पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट आम जनता की बदहाली पर चुप्पी साधे हुए, संदेहास्पद आंकड़ों पर आधारित एक “स्व-प्रशंसा पत्र” मात्र है।

जारी बयान में प्रभाष घोष ने कहा कि बजट में न तो किसी भी क्षेत्र के लिए स्पष्ट सेक्टर-वार आवंटन की जानकारी दी गई है और न ही पहले घोषित योजनाओं व परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट का कोई उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट भाषण को जानबूझकर जटिल अकादमिक शब्दावली से भर दिया गया, ताकि जनता असल सच्चाई को समझ न सके।

उन्होंने कहा कि यह बजट साफ तौर पर बड़े कॉरपोरेट घरानों और कर चोरों को अधिक रियायतें देने का संकेत देता है। सरकार द्वारा 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा पूरी तरह भ्रामक है, जो गलत मानकों और अवैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है।

प्रभाष घोष ने कहा कि बजट में बढ़ती महंगाई, रुपये की गिरती कीमत, बेरोजगारी, उद्योगों के बंद होने, नौकरियों में कटौती, किसानों की घटती आय और कृषि के तेज़ी से हो रहे कॉर्पोरेटीकरण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर एक शब्द तक नहीं कहा गया है, जबकि यही समस्याएं आम नागरिकों के जीवन को तबाह कर रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नागरिकों की ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ की चिंता को दरकिनार कर ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ को प्राथमिकता दी है।
बयान में कहा गया कि वार्षिक बजट को जनता के जीवन से जुड़े बुनियादी आर्थिक तथ्यों से रहित एक उपदेशात्मक दस्तावेज़ में बदल दिया गया है।

अंत में प्रभाष घोष ने कहा कि यह बजट लगातार गरीब और संकटग्रस्त होते भारतीयों को राहत देने में पूरी तरह विफल है और एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) इसे “लॉक, स्टॉक एंड बैरल” खारिज करती है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें