किसान, मध्यम वर्ग और आमजन फिर ठगे गए, चंद धन्ना सेठों को ही फायदा
रेवाडी/चंडीगढ़ | 1 फरवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए वर्ष 2026-27 के बजट को जुमलेबाजी और खोखले दावों का बजट करार देते हुए कहा कि इसमें जनता को मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाकर ठगा गया है। उन्होंने कहा कि बजट में न तो इन सपनों को पूरा करने के लिए कोई ठोस योजना है और न ही पर्याप्त वित्तीय आवंटन।
विद्रोही ने कहा कि आयकरदाताओं को बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन आयकर व्यवस्था यथावत रखकर उन्हें निराश किया गया। आयकर सुधारों के लंबे-चौड़े दावे किए गए, मगर आम नागरिक को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि केवल शब्दों के सहारे जनता को गुमराह किया गया है।
किसानों को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए विद्रोही ने कहा कि किसान आय दोगुनी होने का सपना अब भी सपना ही है, उलटे कृषि लागत और बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बजट में भी कृषि उत्पादन और किसान आय बढ़ाने की बातें तो की गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर डालने वाली कोई ठोस नीति सामने नहीं आई।
गरीबी के आंकड़ों पर सरकार को घेरते हुए विद्रोही ने कहा कि एक तरफ दावा किया जाता है कि 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए, वहीं दूसरी तरफ 80 करोड़ लोगों को हर माह 5 किलो मुफ्त राशन दिया जा रहा है। यह विरोधाभास सरकार के दावों की पोल खोलता है।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के पूरे भाषण में “हम चाहते हैं” जैसे शब्द हावी रहे, लेकिन सरकार के चाहने मात्र से आमजन की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरती। इसके लिए ठोस कार्यक्रम और वास्तविक बजटीय प्रावधान जरूरी हैं, जिनका बजट में घोर अभाव है।
शहरी विकास और आधारभूत ढांचे पर सरकार के दावों को भी विद्रोही ने जुमला करार दिया। उन्होंने कहा कि 100 स्मार्ट सिटी का क्या हुआ, यह देश जानता है। रोजगार सृजन के बड़े-बड़े दावों के बावजूद बेरोजगारी जस की तस बनी हुई है। एमएसएमई पर भाषण तो दिए गए, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और जीडीपी में गिरावट सरकार की नाकामी को उजागर करती है।
राजकोषीय स्थिति पर टिप्पणी करते हुए विद्रोही ने कहा कि 2047 के सपनों की बात करने वाली सरकार, वर्तमान बजट में ही दिशाहीन नजर आ रही है। सरकार द्वारा बताए गए 4.4 प्रतिशत राजस्व घाटे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह घाटा केवल बजट आवंटन खर्च न करके दिखावटी तौर पर नियंत्रित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी का 55.6 प्रतिशत कर्ज बोझ यह साफ बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कर्ज पर टिकी हुई है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि बजट 2026-27 चंद धन्ना सेठों के लिए लाभकारी, जबकि 99 प्रतिशत नागरिकों के लिए निराशाजनक है। इस बजट से महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बोझ बढ़ना तय है, जिससे आमजन, किसान, मजदूर और गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।









