संतुलन की पतली रस्सी पर बजट 2026

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— डॉ० प्रियंका सौरभ

आज 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026 ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार आर्थिक अनुशासन और जनता की आकांक्षाओं के बीच एक बेहद संकरी राह पर चल रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण की शुरुआत स्थिरता, निरंतरता और दीर्घकालिक विकास की सोच से की। इस बार कोई चौंकाने वाली लोकलुभावन घोषणाएँ नहीं दिखीं, बल्कि बजट ने एक यथार्थवादी और संयमित दृष्टिकोण अपनाया।

राजकोषीय घाटे को वित्तीय वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है, जो पूर्व निर्धारित 4.5 प्रतिशत लक्ष्य से भी कम है। यह कदम वित्तीय अनुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पूंजीगत व्यय को पिछले वर्ष के 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.5 लाख करोड़ रुपये किया गया है—लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि—जो बुनियादी ढाँचे, शहरी विकास और डिजिटल तकनीक पर केंद्रित है। निजी निवेश को गति देने के लिए संपत्ति मुद्रीकरण योजना के तहत 10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने बीते वर्ष 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, लेकिन वैश्विक मंदी, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और घरेलू मुद्रास्फीति जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में प्रभावी राजस्व घाटे को 96,654 करोड़ रुपये (जीडीपी का मात्र 0.3 प्रतिशत) तक सीमित रखना एक सख्त वित्तीय संकेत है। पूंजीगत व्यय के अंतर्गत राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचा पाइपलाइन को नई रफ्तार देने की तैयारी है—50,000 किलोमीटर अतिरिक्त राजमार्ग, रेलवे विद्युतीकरण व आधुनिकीकरण के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये, और राज्यों को 1.5 लाख करोड़ रुपये का 50 वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋण।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को प्रोत्साहित करने के लिए कर छूट, एकल-खिड़की प्रणाली और तेज़ मंज़ूरी प्रक्रियाएँ अपनाई गई हैं। संदेश साफ़ है—निवेशकों के लिए दरवाज़े खुले हैं। लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या यह निवेश ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ठोस रोजगार पैदा करेगा या विकास की चमक महानगरों तक ही सीमित रह जाएगी?

देश की जीडीपी में लगभग 40 प्रतिशत योगदान देने वाले मध्यम वर्ग को इस बजट में उल्लेखनीय कर राहत मिली है। पुरानी कर व्यवस्था में मानक कटौती को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया गया है। नई कर व्यवस्था में 5 लाख रुपये तक की आय को कर-मुक्त किया गया। शिक्षा ऋण (10 लाख रुपये तक) पर टीसीएस हटाया गया, किराया टीडीएस सीमा 2.4 लाख से बढ़ाकर 6 लाख रुपये की गई और दो स्व-व्यवहृत आवासीय संपत्तियों पर कर राहत दी गई है। आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को 2 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष किया जाना और कर संहिता को 819 धाराओं से घटाकर 536 धाराओं में समेटने का वादा स्वागतयोग्य है। हालांकि, इन सुधारों की असली सफलता जमीनी स्तर पर अनुपालन की सरलता पर निर्भर करेगी।

कृषि क्षेत्र—जो 18 प्रतिशत जीडीपी और 65 प्रतिशत ग्रामीण आबादी का आधार है—पर बजट ने विशेष फोकस रखा है। प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना का विस्तार 100 जिलों तक किया गया है। फसल विविधीकरण, सिंचाई, भंडारण, पीएम-किसान सम्मान निधि में वृद्धि और किसान क्रेडिट कार्ड सीमा बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं। मत्स्य पालन के लिए अंडमान-लक्षद्वीप में आर्थिक क्षेत्र और फल-सब्ज़ी आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने की योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती है। मनरेगा बजट में वृद्धि और स्वयं सहायता समूहों को आसान ऋण की व्यवस्था सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँचना अनिवार्य है।

महिला सशक्तीकरण के लिए लक्ष्मी वंदना योजना का विस्तार, 20 लाख रुपये तक स्वरोज़गार ऋण पर गारंटी हटाना और शहरी महिलाओं के घर-आधारित कार्य को कर-छूट देना अहम कदम हैं। पंचायती राज संस्थाओं के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान उन राज्यों में प्रभावी नेतृत्व को बढ़ावा देगा जहाँ महिला आरक्षण 50 प्रतिशत है—बशर्ते क्रियान्वयन ईमानदार हो।

युवाओं के लिए शिक्षा बजट 1.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक रखा गया है। 50 नए आईआईटी और मेडिकल कॉलेज, स्किल इंडिया के लिए 2 लाख करोड़ रुपये और 5 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के माध्यम से स्टाइपेंड देने की योजना युवाशक्ति को साधने का प्रयास है। स्टार्टअप इंडिया फंड में 50,000 करोड़ रुपये का आवंटन उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा। फिर भी प्रश्न यही है—क्या ये योजनाएँ स्थायी नौकरियों में बदल पाएँगी?

तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में एआई केंद्र, 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी से 2 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य, डिजिटल इंडिया के लिए 1 लाख करोड़ और स्वच्छ ऊर्जा पर 5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान भारत के भविष्य की रूपरेखा खींचता है। एफडीआई में 100 प्रतिशत बीमा और जन विश्वास विधेयक 2.0 से कानूनों का सरलीकरण निवेश माहौल को बेहतर बना सकता है, बशर्ते डिजिटल विभाजन को पाटा जाए।

अंततः, मुद्रास्फीति नियंत्रण, 6.5 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट, पर्यावरण संरक्षण, निर्यात और नवाचार—ये सभी बजट की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। बजट 2026 गरीब, किसान, युवा और महिलाओं पर केंद्रित एक यथार्थवादी रोडमैप पेश करता है। दिशा स्पष्ट है, इरादे भी—अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की है।

रस्सी पतली है, संतुलन कठिन—अब देखना है कि सरकार कदम कितनी मजबूती से रखती है।

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Author: Bharat Sarathi

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