ट्रांसपोर्ट सेंटर के नाम पर अधिग्रहित प्राचीन मंदिर की भूमि पर विवाद गहराया

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महंत विजय दास बोले—या तो बने ट्रांसपोर्ट सेंटर, या लौटाई जाए मंदिर की जमीन, या फिर बने सनातन धर्म का मंदिर

कुरुक्षेत्र। थानेसर क्षेत्र के उमरी गांव स्थित एक प्राचीन सनातन धर्म मंदिर की भूमि को लेकर वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मंदिर के महंत विजय दास एवं साधु समाज ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि जिस उद्देश्य से मंदिर की भूमि का अधिग्रहण किया गया था, यदि वह उद्देश्य आज तक पूरा नहीं हुआ है तो या तो वहां ट्रांसपोर्ट सेंटर बनाया जाए, या फिर अधिग्रहित भूमि मंदिर को वापस दी जाए, अथवा उसी भूमि पर सनातन धर्म का मंदिर निर्मित किया जाए।

2002 में हुआ था अधिग्रहण, आज तक नहीं हुआ विकास

प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार वर्ष 2002 में हरियाणा सरकार द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर/ट्रांसपोर्ट सेंटर निर्माण के लिए उमरी गांव की लगभग 69 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस अधिग्रहण में प्राचीन मंदिर की भूमि भी शामिल थी। मंदिर पक्ष का कहना है कि अधिग्रहण को 20 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक उस भूमि पर न तो ट्रांसपोर्ट सेंटर बना और न ही कोई ठोस विकास कार्य हुआ।

मुआवज़े पर भी उठे सवाल

महंत विजय दास ने आरोप लगाया कि अधिग्रहण के दौरान बड़ी संख्या में किसानों और भूमि स्वामियों को न तो समुचित मुआवज़ा दिया गया और न ही पुनर्वास की व्यवस्था की गई। दस्तावेज़ों में उल्लेख है कि लगभग 65 से अधिक भूमि मालिकों ने आज तक मुआवज़ा स्वीकार नहीं किया, जबकि केवल कुछ ही लोगों को भुगतान किया गया। मंदिर भूमि के मामले में भी मुआवज़ा अस्वीकार कर दिया गया था।

2024 में दूसरी धार्मिक संरचना का प्रस्ताव, विरोध तेज

मंदिर पक्ष का कहना है कि हाल ही में वर्ष 2024 में उसी अधिग्रहित भूमि पर एक अन्य धार्मिक स्थल के निर्माण का प्रस्ताव सामने आया, जिससे विवाद और गहरा गया। महंत विजय दास का स्पष्ट कहना है कि यह भूमि मूल रूप से सनातन धर्म के प्राचीन मंदिर की थी, इसलिए यदि धार्मिक निर्माण होना ही है तो वहां सनातन परंपरा के अनुसार मंदिर ही बने।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी विशेष समुदाय या धर्म के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह भूमि अधिकार और आस्था से जुड़ा विषय है।
“हम नहीं चाहते कि मंदिर की जमीन पर मनमाने ढंग से कुछ और बनाया जाए। या तो सरकार अपने उद्देश्य के अनुसार ट्रांसपोर्ट सेंटर बनाए, या हमारी जमीन हमें लौटाए, या फिर उसी स्थान पर हमारे सनातन धर्म का मंदिर बने,” — महंत विजय दास।

सरकार को कई बार सौंपे गए ज्ञापन

मंदिर प्रबंधन और साधु समाज द्वारा मुख्यमंत्री, शहरी विकास विभाग, एस्टेट ऑफिसर तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखित ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। इन ज्ञापनों में भूमि को डी-नोटिफाई करने, स्वामित्व बहाल करने और अधिग्रहण कानूनों के उल्लंघन की जांच की मांग की गई है।

कानूनी प्रावधानों का भी हवाला

मंदिर पक्ष ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 तथा हरियाणा संशोधन अधिनियम 2017 का हवाला देते हुए कहा है कि यदि अधिग्रहित भूमि का उपयोग तय समयसीमा में नहीं किया गया, तो उसे मूल स्वामी को लौटाया जाना चाहिए।

प्रशासन की चुप्पी

मामले में अभी तक प्रशासन या सरकार की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सूत्रों के अनुसार प्रकरण उच्च स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है।

आस्था और अधिकार का सवाल

यह मामला अब केवल जमीन का नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा बनता जा रहा है। मंदिर पक्ष का कहना है कि प्राचीन मंदिर आज भी अस्तित्व में है और वे उसी परंपरा के महंत हैं, इसलिए उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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