27 जनवरी की घोषित छुट्टी को निजी स्कूलों ने किया नज़रअंदाज़, प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह मौन: किरण चौधरी
गुरुग्राम। गुरुग्राम की सामाजिक कार्यकर्ता किरण चौधरी ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की घोषणा की अवहेलना पर कड़ी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 2026 को गुरुग्राम के देवी लाल स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से राज्य के सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में 27 जनवरी 2026 को अवकाश घोषित करने की घोषणा की थी। इस घोषणा से बच्चों और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई थी।
किरण चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह ऐलान गुरुग्राम में अगले ही दिन मज़ाक बनकर रह गया। शहर के गली-मोहल्लों से लेकर बड़े-बड़े नामी निजी स्कूल 27 जनवरी को खुले पाए गए। निजी स्कूल प्रबंधन ने खुलेआम मुख्यमंत्री की घोषणा को नज़रअंदाज़ किया, जिससे यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या निजी स्कूल खुद को सरकार, कानून और शासन से ऊपर मानते हैं?
उन्होंने कहा कि चौंकाने वाली बात यह रही कि इतने बड़े स्तर पर नियमों की अवहेलना के बावजूद गुरुग्राम प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह मौन बना रहा। न तो किसी प्रकार का निरीक्षण किया गया, न नोटिस जारी हुआ और न ही किसी स्कूल के खिलाफ ठोस कार्रवाई सामने आई।
किरण चौधरी ने बताया कि यह कोई पहला मामला नहीं है। गुरुग्राम के दर्जनों निजी स्कूल आज भी मान्यता, फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों को लेकर सवालों के घेरे में हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई अक्सर काग़ज़ों तक ही सीमित रह जाती है। यह स्थिति प्रशासन की कार्यशैली और इच्छाशक्ति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
उन्होंने 11 अप्रैल 2024 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के कनीना क्षेत्र में जी.एल. पब्लिक स्कूल द्वारा ईद की छुट्टी के दिन स्कूल खोले जाने के कारण एक बड़ा हादसा हुआ था। उस घटना के बाद शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग हरकत में आए थे और निजी स्कूलों की जांच भी शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में वह कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
किरण चौधरी ने कहा कि अब जब स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से स्पष्ट घोषणा की गई थी कि 27 जनवरी को सभी सरकारी व निजी स्कूल बंद रहेंगे, तो कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं—
- निजी स्कूल खुले क्यों रहे?
- मुख्यमंत्री की घोषणा की अवहेलना करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या कानून और सरकारी आदेश केवल भाषणों और काग़ज़ों तक ही सीमित रह गए हैं?
उन्होंने मांग की कि नियमों की खुलेआम अवहेलना करने वाले निजी स्कूलों पर तत्काल और सख़्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकार और मुख्यमंत्री की घोषणाओं की गरिमा बनी रहे और बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।









