चंडीगढ़, 25/1/26 – महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के संरक्षण और इसकी मूल भावना को बनाए रखने के उद्देश्य से ,हरियाणा प्रभारी बीके हरिप्रसाद की अध्यक्षता में, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राव नरेंद्र के नेतृत्व में एक जूम बैठक आयोजित की गई । जिसमें सह प्रभारी प्रफुल्ल गुड्धे, जितेंद्र बघेल, सहित कांग्रेसी सांसद, विधायक, मनरेगा जिला प्रभारी ,अग्रणी संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों, प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
प्रभारी बीके हरि प्रसाद ने बैठक के दौरान विशेष निर्देश देते हुए सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों, एवं प्रदेश पदाधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पदयात्रा के माध्यम से लोगों से संवाद करें, उनसे चर्चा करें और आमजन को जागरूक करने का कार्य करें।
उन्होंने कहा कि यह बैठक हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के नाम और ढांचे में किए गए बदलावों के विरोध में जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की दिशा में एक प्रमुख कदम है।
वहीं बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत की गरीब आबादी, मजदूरों, छोटे किसानों और भूमिहीन श्रमिकों के लिए एक मजबूत जीवनरेखा साबित हुआ है। यह योजना न केवल 100 दिनों का गारंटीड रोजगार प्रदान करती थी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, जल संरक्षण, सड़क निर्माण, भूमि विकास जैसे कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास सुनिश्चित करती थी।
राव नरेंद्र सिंह ने केंद्र की वर्तमान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत इस ऐतिहासिक कानून को कमजोर किया जा रहा है और इसे महज एक ‘स्कीम’ में बदल दिया गया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (संक्षेप में VB-G RAM G या जी राम जी) के नाम से प्रचारित इस नए प्रावधान के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार के दावों के बावजूद, अधिकांश ग्रामीण श्रमिकों को 50 दिन से अधिक का रोजगार भी नहीं मिल पा रहा है। मजदूरी का समय पर भुगतान नहीं हो रहा, और योजना की पारदर्शिता तथा प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।”
प्रदेश अध्यक्ष ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि नए बदलावों के तहत पंचायतों के अधिकारों को लगभग समाप्त कर दिया गया है। अब निर्णय लेने की शक्तियां केंद्र सरकार के हाथ में केंद्रित हो गई हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर योजना के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने इसे ग्रामीण लोकतंत्र पर हमला करार दिया।
सबसे अधिक आक्रोश इस बात पर व्यक्त किया गया कि योजना का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कर दिया गया है और इसे ‘जी राम जी’ कहकर प्रचारित किया जा रहा है। राव नरेंद्र सिंह ने इसे भ्रामक और आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा, “राम जी का पवित्र नाम इतने संवेदनशील और जनकल्याण से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना न केवल गलत है, बल्कि जनता को गुमराह करने की कोशिश भी है। महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना को हटाकर ऐसा करना राष्ट्रपिता का अपमान है।”
बैठक में उन्होंने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को मनरेगा के तहत मिलने वाले अधिकारों, न्यूनतम मजदूरी, समयबद्ध भुगतान, जॉब कार्ड, सामाजिक ऑडिट और अन्य प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दें। साथ ही, उन्हें नए बदलावों से होने वाले नुकसान और अधिकारों पर डाका डालने की बात बताएं।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यह जागरूकता अभियान 25 फरवरी तक पूरे प्रदेश में तेजी से चलाया जाए, ताकि ग्रामीण जनता को सच्चाई पता चले और वे अपने हकों के लिए आवाज उठा सकें।
ज़ूम बैठक में प्रदेश के लगभग सभी कांग्रेस सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, महिला एवं युवा कांग्रेस के पदाधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। सभी ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं से अवगत कराया और संगठनात्मक रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। कई नेताओं ने सुझाव दिए कि सोशल मीडिया, ग्राम सभाओं और चौपालों के माध्यम से इस मुद्दे को और व्यापक बनाया जाए।
बैठक के समापन पर प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सभी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी मनरेगा की मूल भावना को मजबूत करने, ग्रामीण मजदूरों के हितों की रक्षा करने और उनके अधिकारों को छीनने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करती रहेगी। यह हमारा संकल्प है कि ग्रामीण भारत के हर मजदूर को उसका हक मिले।








