सोशल एवं पॉलिटिकल एक्टिविस्ट सतवंती नेहरा ने प्रशासन से मांगी जवाबदेही
कहा—जनहित की अनदेखी कर दी गई तो भुगतनी पड़ेगी गंभीर कीमत
सीवरेज, ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता
हजारों की आबादी बसाने से पहले बुनियादी ढांचे का अभाव

गुरुग्राम। वार्ड नंबर 34 स्थित राजेंद्र पार्क–सूरत नगर क्षेत्र में एटीएस द्वारा विकसित किए जा रहे बड़े आवासीय प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध में सोशल एवं पॉलिटिकल एक्टिविस्ट सतवंती नेहरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रोजेक्ट के पूरा होने पर हजारों की संख्या में आबादी यहां बसाई जाएगी, जबकि क्षेत्र पहले से ही बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है।
सतवंती नेहरा ने स्पष्ट किया कि उन्हें एटीएस के मालिक या किसी व्यक्ति विशेष से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि यह मुद्दा पूरी तरह जनहित से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि जिस प्रोजेक्ट को वर्षों तक नियमों और आपत्तियों के चलते रोका गया था, उसे पुनः शुरू करने की अनुमति देते समय क्या सभी नियमों, शर्तों और जनहित से जुड़े पहलुओं का विधिवत पालन किया गया है?
एसटीपी नहीं, सीवरेज व्यवस्था चरमराई
सतवंती नेहरा के अनुसार, राजेंद्र पार्क और सूरत नगर क्षेत्र में न तो कोई स्वतंत्र सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) है और न ही मौजूदा सीवरेज व्यवस्था संतोषजनक है। ऐसे में नई आबादी जुड़ने से स्थिति और गंभीर होना तय है।
संकीर्ण पुल बनेगा जाम और हादसों की वजह
उन्होंने बताया कि धानुका क्षेत्र को बचाने के नाम पर पहले ही पुल को छोटा किया गया था और आज भी वही संकीर्ण पुल इस प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है। यदि पुल को चौड़ा किए बिना प्रोजेक्ट आगे बढ़ाया गया, तो भविष्य में भारी ट्रैफिक जाम और आपात स्थितियों में बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
पार्षद की भूमिका पर भी उठे सवाल
सतवंती नेहरा ने वार्ड नंबर 34 की पार्षद पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि न तो उन्होंने जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और न ही बुनियादी सुविधाओं को लेकर कोई ठोस प्रयास किया। उनका फोकस जनहित के बजाय व्यक्तिगत और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं तक सीमित दिखाई देता है।
प्रशासन से सीधे सवाल
सोशल एवं पॉलिटिकल एक्टिविस्ट सतवंती नेहरा ने सरकार और प्रशासन से पूछा—
- क्या एटीएस को दी गई अनुमति जनहित को ध्यान में रखकर दी गई है?
- क्या सीवरेज, यातायात, आपातकालीन सेवाओं और अन्य बुनियादी ढांचे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है?
- क्या इतनी सीमित जगह पर बड़ा प्रोजेक्ट भविष्य में किसी अनहोनी को न्योता नहीं देगा?
उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की जन-हानि या माल-हानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार, प्रशासन और बिल्डर पर तय की जानी चाहिए।
जनहित में प्रमुख मांगें
सतवंती नेहरा ने मांग की कि—
- प्रोजेक्ट की अनुमति पर पुनर्विचार किया जाए।
- पुल को पहले चौड़ा किया जाए और यातायात व्यवस्था सुधारी जाए।
- सीवरेज और एसटीपी जैसी मूलभूत सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि तभी क्षेत्र की जनता को जाम, गंदगी और अव्यवस्था से राहत मिल सकेगी और सुरक्षित व सुगम आवागमन संभव हो पाएगा।








