एसवाईएल नहर निर्माण ही एकमात्र विकल्प, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही केंद्र सरकार
चंडीगढ़/रेवाडी | 18 जनवरी 2026 – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बैठक के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा यह कहे जाने कि “पंजाब के पास हरियाणा को देने के लिए फालतू पानी नहीं है, इसलिए एसवाईएल नहर निर्माण का कोई औचित्य नहीं”—पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि सतलुज, रावी और ब्यास का पानी कोई खैरात नहीं बल्कि हरियाणा का संवैधानिक अधिकार है, जिससे पंजाब किसी भी स्थिति में इंकार नहीं कर सकता।
विद्रोही ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब के पास अपनी जरूरतों के बाद पानी बचता है या नहीं, यह हरियाणा के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता। 1 नवंबर 1966 को राज्य पुनर्गठन के तहत जब हरियाणा का गठन हुआ, उसी समय संयुक्त पंजाब के सभी संसाधनों का 60:40 के अनुपात में बंटवारा हुआ था, और यह अनुपात नदियों के जल पर भी समान रूप से लागू होता है। इसके बावजूद पंजाब पिछले 59 वर्षों से हरियाणा को उसके हिस्से का पानी न देकर लगातार असंवैधानिक कृत्य करता आ रहा है।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर और सतलुज–रावी–ब्यास के जल बंटवारे पर अंतिम फैसला हरियाणा के पक्ष में दिया था। इतना ही नहीं, इस फैसले को लागू न करने के लिए पंजाब द्वारा खड़े किए गए सभी कानूनी अवरोधों को भी सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2016 में खारिज कर दिया। इसके बाद पंजाब के पास एसवाईएल नहर निर्माण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
वेदप्रकाश विद्रोही ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हरियाणा-विरोधी और उपेक्षापूर्ण रवैये के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पिछले 9 वर्षों से पंजाब में अधूरी पड़ी एसवाईएल नहर का निर्माण नहीं कराया गया। केंद्र सरकार की इसी निष्क्रियता के कारण पंजाब सरकार को “फालतू पानी नहीं है” जैसे तर्क देने का साहस मिल रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वे हरियाणा के प्रति अपनाए गए भेदभावपूर्ण रवैये को त्यागकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाएँ और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप पंजाब में अधूरी पड़ी एसवाईएल नहर का निर्माण तत्काल कराएँ। विद्रोही ने सुझाव दिया कि नहर निर्माण का कार्य सेना की निगरानी में केंद्रीय सीमा सड़क संगठन (BRO) से कराया जाए, ताकि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।






