कालसर्प योग वाले व्यक्ति के लिए शिवरात्रि सर्वोपरि, दोष निवारण से मिलता है तनावमुक्त जीवन और आरोग्यता
वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक

कुरुक्षेत्र, : यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाएं, तो उसे कालसर्प दोष कहा जाता है। इसे जन्मकुंडली का बंधन योग भी माना जाता है। शिवरात्रि के पावन पर्व पर कालसर्प दोष निवारण के उपायों का विशेष महत्व बताया गया है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी।
षडदर्शन साधुसमाज के संगठन सचिव वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक ने बताया कि शिवभक्तों को कालसर्प योग से घबराने की आवश्यकता नहीं है। जो श्रद्धालु नित्य शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं, वे इस दोष के प्रभाव से काफी हद तक मुक्त रहते हैं।
उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर नाग-नागिन का चांदी का जोड़ा बनवाकर उस पर सोने का पानी चढ़वाना चाहिए। इसके साथ सवा किलो चने की दाल, सवा मीटर पीला कपड़ा, दो जनेऊ, केसर, पांच प्रकार के फल, पांच प्रकार के मेवे, पंचामृत, गाय का कच्चा दूध, पीले फूल, पीले फूलों की माला तथा 27 बूंदी के लड्डू शिवलिंग पर अर्पित करने से कालसर्प दोष के निवारण की मान्यता है।
कौशिक ने यह भी स्पष्ट किया कि कालसर्प योग जैसे प्रमुख दोषों का ऐसा कोई उपाय नहीं है, जिसे एक बार करने से जीवनभर के लिए पूर्ण प्रभाव मिल जाए। इसलिए किसी भी भ्रम में पड़े बिना हर वर्ष महाशिवरात्रि या नागपंचमी जैसे पावन अवसरों पर भगवान शिव की आराधना कर दोष निवारण का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस उपाय से जातक को मानसिक शांति प्राप्त होती है, पितर प्रसन्न होते हैं, धन-धान्य में वृद्धि होती है और पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं। साथ ही संतान सुख की प्राप्ति के भी योग बनते हैं।






