डॉक्टर ने दिया बेड रेस्ट, कुर्सी ने दिया सहारा: अनुराग रस्तोगी पर खुल्लर–ढेसी प्रभाव : गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा

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सेहत बाद में, कुर्सी पहले: हार्ट सर्जरी के बाद भी रस्तोगी साहब डटे, खुल्लर–ढेसी की राह पर

— पवन कुमार बंसल

सीरियस हार्ट सर्जरी के बाद डॉक्टरों की सलाह पर दो महीने के बेड रेस्ट की ज़रूरत… लेकिन जनाब सीएस अनुराग रस्तोगी जल्द ही ड्यूटी जॉइन करेंगे।
क्यों?
क्योंकि इस मुल्क में सेहत से ज़्यादा कुर्सी का इलाज असरदार होता है।

यह बात सुनते ही एक पुराना क़िस्सा याद आ गया— पंजाब में एक मंत्री का एक्सीडेंट हो गया। गर्दन टेढ़ी हो गई। किसी शुभचिंतक ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा—
“सरदार जी, सेहत ठीक नहीं है, मंत्री पद छोड़ दो।”

सरदार जी हँसे और बोले—
“काका, वज़ीर रहूँगा तो सेहत अपने आप ठीक हो जाएगी।
वज़ीर नहीं रहा तो कुत्ता भी पूछने नहीं आएगा।”

बस, यही भारतीय प्रशासन और राजनीति का मेडिकल साइंस है।

अब जनाब रस्तोगी साहब कोई नौसिखिया नहीं हैं।
दुनियादारी बख़ूबी जानते हैं।
चीफ सेक्रेटरी जैसे शीर्ष पद तक पहुँचे,
ऊपर से एक साल की एक्सटेंशन का रिकॉर्ड भी बना दिया।

अब सीएस रहेंगे, तो सेहत भी “मैनेज” हो जाएगी। और अगर सीएम साहब मेहरबान रहे,
तो रिटायरमेंट के बाद भी कोई न कोई कुर्सी प्रसाद मिल ही जाएगा।
वैसे भी राइट टू सर्विस कमीशन के चेयरमैन का पद खाली होने वाला है—
संभावनाओं की खेती तैयार है।

यह कहानी सिर्फ़ रस्तोगी साहब तक सीमित नहीं।

राजेश खुल्लर साहब और ढेसी साहब भी कुर्सी से ऐसे चिपके हैं,
जैसे इनके बिना सरकार का इंजन ही जाम हो जाएगा।

खुल्लर साहब की मैडम—
एचपीएससी की सदस्य।
पहले आईएएस बनवाने की कोशिश,
फिर रिटायरमेंट के बाद खुद सीएम के सीपीएस।

ढेसी साहब ने तो कमाल ही कर दिया—
पहले चीफ सेक्रेटरी, फिर किसी अथॉरिटी के चेयरमैन, फिर सीएम के सीपीएस,
और जब ज़्यादा हो गया…
तो घोड़ी से उतार कर गधी पर बैठा दिया—
गुरुग्राम में कोई नामालूम-सा ओहदा,
बस दुमछला बनाकर।

हरियाणा में एक कहावत है—
“अगर हांडी अपना मुँह खोल दे,
तो कुत्ते को भी सब्र से खाना चाहिए,
ताकि जन्म खराब न हो।”

लेकिन यहाँ तो हांडियाँ मुँह खोलकर, पूरे प्रशासन पर उलट दी जा रही हैं—
और कुत्ते ही नहीं, पूरा सिस्टम जीभ बाहर निकालकर बैठा है।

गुस्ताख़ी माफ़…

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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