भीषण ठंड में हरियाणा सरकार बेपरवाह, गरीब-बेसहारा रामभरोसे: वेदप्रकाश विद्रोही

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रेवाड़ी सहित प्रदेश के 8–10 जिलों में तापमान माइनस में, 2047 के विकसित भारत के दावों पर सवाल; मुख्यमंत्री से ठोस कदम उठाने की मांग

रेवाड़ी/चंडीगढ़, 13 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा में पड़ रही भीषण ठंड के बीच भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा एक ओर वर्ष 2047 के “विकसित भारत” का सपना दिखाकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि दूसरी ओर वर्ष 2026 में कड़ाके की ठंड से जूझ रहे गरीब, बेघर और बेसहारा लोगों को बचाने के लिए सरकार के पास न तो समय है, न संसाधन और न ही कोई ठोस रोडमैप।

विद्रोही ने बताया कि उनके गृह जिले रेवाड़ी में न्यूनतम तापमान गिरकर माइनस डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। अहीरवाल क्षेत्र में इस तरह की भयंकर ठंड कब पड़ी थी, यह बहुत कम लोगों को याद है। उन्होंने कहा कि पूरे हरियाणा में इस स्तर की ठंड आखिरी बार वर्ष 1977 में देखने को मिली थी। वर्तमान में अहीरवाल सहित प्रदेश के 8 से 10 जिलों में तापमान माइनस डेढ़ से दो डिग्री के बीच बना हुआ है, जो गंभीर शीतलहर का स्पष्ट प्रमाण है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ये आंकड़े स्वयं भाजपा सरकार और उसके प्रशासन के हैं, इसके बावजूद रेवाड़ी सहित पूरे प्रदेश में कहीं भी गरीबों, बेघरों और बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। न तो रैन बसेरे बढ़ाए गए हैं, न कंबल वितरण की व्यापक व्यवस्था की गई है और न ही आपात राहत के इंतजाम किए गए हैं। विद्रोही के अनुसार, भाजपा सरकार के मंत्री और अधिकारी इस दिशा में सोचने तक को तैयार नहीं हैं।

वेदप्रकाश विद्रोही ने लोकसंपर्क विभाग (डीपीआरओ) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकसंपर्क विभाग द्वारा मीडिया में प्रायोजित बयान जारी कर भयंकर ठंड पर केवल उपदेश दिए जा रहे हैं, जबकि जिन अधिकारियों के नाम से ये बयान जारी होते हैं, उन्हें खुद यह तक जानकारी नहीं होती कि उनके नाम से क्या कहा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह डीपीआरओ मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और भाजपा पदाधिकारियों के नाम पर विकास, जनहित और कांग्रेस विरोध से जुड़े कथित फर्जी बयान लगातार जारी करता रहता है।

विद्रोही ने भाजपा सरकार को “लूट और झूठ की सरकार” करार देते हुए कहा कि इसके आंकड़े और दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि 2047 के विकसित भारत का सपना दिखाकर आम जनता को ठगा जा रहा है, जबकि आज 2026 में गरीब, बेघर और बेसहारा लोग भीषण ठंड में भगवान भरोसे छोड़ दिए गए हैं।

अंत में वेदप्रकाश विद्रोही ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अपील की कि वे खोखले दावों, जुमलों और चुटकलेबाजी से बाहर निकलकर संवेदनशीलता दिखाएं और इस भीषण ठंड में गरीबों, बेघरों और बेसहारा लोगों को बचाने के लिए तुरंत गंभीर और ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार की यह उदासीनता साफ तौर पर उसकी असंवेदनशील और जनविरोधी मानसिकता को उजागर करती है।

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Author: Bharat Sarathi

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