राम रहीम को 5 साल में 15वीं बार पैरोल देना सत्ता का दुरुपयोग: वेदप्रकाश विद्रोही

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चंडीगढ़/रेवाडी, 5 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर रेप व हत्या के दोषी गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में राम रहीम को 15वीं बार, कुल लगभग 427 दिनों की पैरोल दिया जाना सत्ता के दुरुपयोग और एक बलात्कारी को राजनीतिक संरक्षण देने की पराकाष्ठा है।

विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सवाल करते हुए पूछा कि क्या पूरे देश में राम रहीम के अलावा कोई और कैदी है, जिसे पाँच वर्षों में 15 बार पैरोल मिली हो? क्या यह सुविधा सभी कैदियों को समान रूप से मिलती है या यह विशेषाधिकार केवल राम रहीम के लिए आरक्षित है?

उन्होंने सवाल उठाया कि हरियाणा की भाजपा सरकार आखिर राम रहीम को बार-बार पैरोल क्यों देती है? भाजपा और राम रहीम के बीच क्या रिश्ता है? विद्रोही ने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल होने के बावजूद न्यायालय द्वारा पैरोल पर प्रभावी रोक न लगाया जाना भी कई सवाल खड़े करता है।

विद्रोही का कहना है कि हरियाणा की जेलों में हजारों ऐसे कैदी हैं, जो मामूली अपराधों में वर्षों से बंद हैं और जमानत तक नहीं मिल पा रही, जबकि दो-दो आजीवन कारावास की सजा पाने वाला राम रहीम जब चाहे जेल से बाहर आ जाता है।

उन्होंने इसे महिलाओं की सुरक्षा के लिए घातक बताते हुए कहा कि क्या बलात्कार के दोषी को बार-बार पैरोल देना समाज में अपराधियों के हौसले नहीं बढ़ाता? विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा-संघ का बलात्कारियों के प्रति नरम रवैया कोई नया नहीं है।

उन्होंने उत्तराखंड के अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह वहां सत्ता के प्रभाव से आरोपियों को बचाने की कोशिशें हुईं, उसने महिलाओं के प्रति भाजपा-संघ की सोच को उजागर कर दिया है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि राम रहीम को पाँच वर्षों में 15 बार पैरोल देना न केवल महिला विरोधी कदम है, बल्कि यह रेपिस्टों को संरक्षण देने का स्पष्ट उदाहरण है, जिसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है।

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Author: Bharat Sarathi

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