लोकसभा में सियासी भूचाल: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का बड़ा दांव

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118 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नोटिस दाखिल • “पक्षपातपूर्ण आचरण” के आरोप •

चर्चा तक सदन से दूर रहने का फैसला • तकनीकी गलती से प्रस्ताव पर संकट की आशंका

नई दिल्ली, 10 फरवरी। बजट सत्र के बीच संसद की राजनीति में बड़ा विस्फोट हुआ है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर सत्ता पक्ष को सीधी चुनौती दे दी है। यह प्रस्ताव 118 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया, जिससे सरकार-विपक्ष टकराव और तेज हो गया है।

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही “स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण” ढंग से चला रहे हैं और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लगभग हमेशा बोलने का मौका नहीं दिया जाता।

टकराव की पृष्ठभूमि

सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव कई दिनों की रणनीतिक बैठकों के बाद लाया गया और यह कदम निचले सदन में लगातार व्यवधान के बीच उठाया गया।
राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में बोलने से रोकना, आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन और कुछ विवादित बयानों पर कार्रवाई न होना—इन मुद्दों को भी विपक्ष ने कारण बताया है।

हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल उठे हैं।

स्पीकर का त्वरित जवाब

नोटिस मिलने के तुरंत बाद ओम बिरला ने सचिवालय से कहा कि प्रस्ताव की जांच कर प्रक्रिया तेज की जाए
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने नैतिक आधार पर प्रस्ताव के निपटारे तक सदन की कार्यवाही में शामिल न होने का फैसला भी किया है।

प्रस्ताव पर तकनीकी संकट?

इसी बीच खबर है कि नोटिस में वर्ष 2025 लिखे जाने जैसी तकनीकी त्रुटियों के कारण प्रस्ताव खारिज भी हो सकता है, जिससे संयुक्त विपक्ष को झटका लग सकता है।

बहुमत बनाम संदेश

संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत स्पीकर को हटाने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव पारित होना जरूरी है और इसके लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस देना होता है।
संख्या बल को देखते हुए इसे विपक्ष का “राजनीतिक दबाव” बनाने वाला कदम माना जा रहा है, जो संसद में बढ़ते गतिरोध को दर्शाता है।

राजनीतिक मायने:
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम सिर्फ संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2026 की राजनीति का तापमान बताने वाला संकेत है—जहां विपक्ष आक्रामक है और सत्ता पक्ष रक्षात्मक मुद्रा में दिखाई दे सकता है।

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Author: Bharat Sarathi

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