लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
गुरुग्राम, 31 दिसंबर। सीवर डीसिल्टिंग (गाद निकालने) के कार्य के दौरान सडक़, नालों एवं सार्वजनिक स्थलों पर बनाए जाने वाले अस्थायी अवरोधों को लेकर नगर निगम गुरुग्राम ने सख्त रुख अपनाया है। संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि डीसिल्टिंग कार्य पूर्ण होते ही सभी अस्थायी अवरोधों, मिट्टी, मलबा एवं अन्य अवशेषों को तत्काल हटाया जाए, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े
नगर निगम गुरुग्राम द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि कई स्थानों पर यह देखा गया है कि सीवर सफाई के बाद अस्थायी रूप से बनाए गए ब्लॉकेज लंबे समय तक नहीं हटाए जाते, जिससे जलभराव, ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। यह स्थिति न केवल नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
कार्य समाप्ति के साथ ही बहाली अनिवार्य
निर्देशों के अनुसार, डीसिल्टिंग कार्य के दौरान खोदी गई सडक़, ढकी गई नालियों या लगाए गए बैरिकेड्स को उसी दिन हटाकर स्थल को पूर्व स्थिति में बहाल करना अनिवार्य होगा। कार्य करने वाली एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सडक़ की सतह समतल हो, नालियां पूरी तरह साफ हों और किसी भी प्रकार का अवरोध शेष न रहे।
निगरानी बढ़ेगी, लापरवाही पर दंड
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी क्षेत्र में अस्थायी अवरोध हटाने में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार, फील्ड स्टाफ एवं अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत जुर्माना, भुगतान रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई तक की व्यवस्था की गई है। संबंधित इंजीनियरों को नियमित निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नागरिकों की सुविधा सर्वोपरि
निगमायुक्त प्रदीप दहिया के अनुसार सीवर डी सिल्टिंग कार्य शहर की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके कारण नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास एवं रखरखाव कार्यों के साथ-साथ आमजन की सुरक्षा, सुगम यातायात और स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जाए।









