11 साल के भाजपा शासन में गुरुग्राम बना प्रदूषण, कूड़ा, जलभराव और जाम का प्रतीक

गुरुग्राम,31 दिसंबर 2025 । संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन गुरुग्राम के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने हरियाणा सरकार के विकास के दावों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के क़ाफ़िले के साथ उड़ती धूल ने गुरुग्राम में तथाकथित विकास की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के शहर में प्रवेश करते ही टूटी सड़कों, गड्ढों और उड़ती धूल ने यह साफ़ कर दिया कि सरकार का विकास केवल काग़ज़ों और विज्ञापनों तक सीमित है।
चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि जब मुख्यमंत्री के स्वागत के समय शहर की सड़कों का यह हाल है, तो आम दिनों में सफ़ाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कितनी बदतर होगी, इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार को 50 प्रतिशत से अधिक राजस्व देने वाला गुरुग्राम आज बदहाली का शिकार है। बदले में इस शहर को मिला है—कूड़े के पहाड़, ज़हरीली हवा, जाम पड़ी सीवरेज लाइनें, जलभराव और अंतहीन ट्रैफिक जाम।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम आज वायु प्रदूषण, गंदगी, सीवरेज ओवरफ्लो, जलभराव और ट्रैफिक अव्यवस्था से जूझ रहा है। न तो सफ़ाई की कोई प्रभावी व्यवस्था है, न बारिश के पानी की निकासी की कोई ठोस योजना। बारिश की पहली बूंद गिरते ही पूरा शहर तालाब में तब्दील हो जाता है और सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है।
चौधरी संतोख सिंह ने आरोप लगाया कि शहर की सफ़ाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सीवरेज सिस्टम जवाब दे चुका है और आम नागरिकों का जीवन नारकीय बन गया है। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा और आर्थिक रूप से समृद्ध शहर होने के बावजूद न तो पर्याप्त सरकारी अस्पताल उपलब्ध हैं और न ही एक ढंग का आधुनिक बस स्टैंड। मूलभूत सुविधाओं के लिए जनता तरस रही है, जबकि सरकार केवल झूठे प्रचार और विज्ञापनबाज़ी में व्यस्त है।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में वास्तविक विकास कहीं दिखाई नहीं देता। विकास केवल फ़ाइलों, काग़ज़ों और घोषणाओं तक सीमित रह गया है। भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और गुरुग्राम की लगातार अनदेखी सरकार की जनविरोधी प्राथमिकताओं को उजागर करती है।
अंत में चौधरी संतोख सिंह ने हरियाणा सरकार से मांग की कि गुरुग्राम की मूलभूत समस्याओं—सफ़ाई, सीवरेज, जलनिकासी, स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रैफिक—का अविलंब समाधान किया जाए तथा शहर को उसके आर्थिक योगदान के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।









