अरावली पर संकट फिलहाल टला, लेकिन लड़ाई अभी बाकी: वेदप्रकाश विद्रोही

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसले पर रोक को बताया जन आंदोलन की बड़ी जीत

चंडीगढ़/रेवाडी, 30 दिसंबर 2025। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा अरावली मामले में पूर्व निर्णय को स्थगित किए जाने का स्वागत करते हुए इसे जनाक्रोश और नागरिक संघर्ष की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इससे अरावली पर्वतमाला के विनाश पर जो तात्कालिक संकट मंडरा रहा था, वह फिलहाल रुक गया है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की पीठ द्वारा 20 नवंबर 2025 को, सेवानिवृत्ति से ठीक पहले, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के शपथपत्र के आधार पर दिया गया फैसला बिना सभी पक्षों को सुने पारित किया गया था। इसी त्रुटिपूर्ण निर्णय के कारण अरावली के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो गया था।

उन्होंने बताया कि वे स्वयं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक इंटरवीन याचिका के माध्यम से पक्षकार हैं। यह याचिका उन्होंने जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष अपने अधिवक्ता कौशल यादव के माध्यम से दाखिल की थी। विद्रोही के अनुसार, “एक याचिकाकर्ता के रूप में मेरा स्पष्ट मानना है कि सभी पक्षों को सुने बिना दिया गया निर्णय न्यायसंगत नहीं था। जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने केस फाइल का अवलोकन कर यह महसूस किया है कि मामले की विस्तृत जांच और सभी पहलुओं की गहन समीक्षा आवश्यक है।”

वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गुरुग्राम की अरावली पहाड़ियों और वन भूमि को गुपचुप तरीके से बिल्डरों और भू-माफियाओं को सौंपने की मंशा से सरकार ने कभी भी पर्यावरण संरक्षण की ईमानदार पैरवी सुप्रीम कोर्ट में नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का रुख अरावली की परिभाषा बदलवाने और गुरुग्राम से सटे कोट फरीदाबाद क्षेत्र में पुनः खनन शुरू करवाने की दिशा में रहा है।

“सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के रिकॉर्ड में हरियाणा सरकार का पक्ष कोई भी देख सकता है,” उन्होंने कहा।

विद्रोही ने हरियाणा और राजस्थान के आम नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और अरावली के महत्व को समझने वाले जागरूक लोगों का आभार जताते हुए कहा कि उनके निरंतर विरोध और जन दबाव के चलते ही सुप्रीम कोर्ट को अपने ही फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर रोक लगानी पड़ी

उन्होंने कहा, “यह जन आंदोलन और नागरिक आवाज की पहली बड़ी जीत है, लेकिन संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। अरावली पर मंडरा रहा संकट केवल कुछ समय के लिए टला है। जब तक सुप्रीम कोर्ट अरावली की परिभाषा बदलने के आदेश को पूर्णतः निरस्त नहीं करता, तब तक नागरिकों को अपना संघर्ष जारी रखना होगा।”

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Author: Bharat Sarathi

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