अरावली बचाने को संगठनों की हुंकार, सरकार के खिलाफ ‘आर-पार’ की लड़ाई का ऐलान

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“विकास चाहिए, लेकिन अरावली की बलि पर नहीं” – कमल प्रधान

चरखी दादरी | जयवीर फ़ौगाट

विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली को विनाश से बचाने के लिए हरियाणा में सामाजिक, किसान और पर्यावरण संगठनों ने निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। तोशाम स्थित चौधरी रघुबीर सिंह फॉर्महाउस पर आयोजित एक अहम बैठक में संगठनों ने स्पष्ट कर दिया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अरावली की कीमत पर तथाकथित विकास किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

युवा कल्याण संगठन के संरक्षक कमल प्रधान ने दो टूक शब्दों में कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस, पानी और भविष्य की सुरक्षा कवच है। उन्होंने सरकार के हालिया फैसलों को तानाशाही मानसिकता का परिणाम बताते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई है।

गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर अन्याय के खिलाफ संघर्ष का आह्वान

कमल प्रधान ने गुरु गोबिंद सिंह जयंती के पावन अवसर पर कहा कि जिस प्रकार गुरु गोबिंद सिंह जी ने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग दिखाया, उसी साहस और संकल्प के साथ आज नागरिकों को अरावली बचाने के लिए आगे आना होगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन को राज्यव्यापी जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

प्रमुख संगठन एक मंच पर

बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा, स्टैंड विद नेचर, प्रोत्साहन सोशल वेलफेयर सोसाइटी, ग्राम विकास युवा मंडल, पर्यटन विकास मंच, किसान सभा सहित दर्जनों सामाजिक-किसान संगठनों ने एकजुट होकर सरकार के फैसलों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया।

आंदोलन की अगली रणनीति तय

बैठक में अरावली संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना तय की गई—

  • सुप्रीम कोर्ट का रुख: सरकार के निर्णय को चुनौती देते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनः याचिका दायर की जाएगी।
  • गांव-गांव जनजागरण: बड़े स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
  • जागरूकता रैलियां: ग्रामीण इलाकों में रैलियां और सभाएं कर अरावली के विनाश से होने वाले दुष्परिणामों को जनता तक पहुंचाया जाएगा।
गणमान्य लोग रहे मौजूद

बैठक में डॉ. लोकेश, देशमुख दादरवाल, रमेश टमाटर वाला, विजेंद्र (पूर्व सरपंच), अमित अत्री, अनिल शेषमा, कविता आर्य, रणविजय ग्रेवाल, सुमीत बराड़, अशोक मलिक, बलबीर बजाड़, उमेद सिंह दहिया, सत्यवीर भुक्कल, मामनराम बाल्मीकि, मुकेश शर्मा (ढाणीमाहु), राजेंद्र फौजी (खानक), दिलबाग ढुल, राजेश गारनपुरा, योगेश पंघाल, रामधारी, युद्धवीर (चेयरमैन), गुड्डू खरकड़ी, बिरसिंह दुल्हैड़ी, रत्नलाल, हरेंद्र सिंह, संदीप तरार, सत्यवान पप्पू, राजेश रतन सिंह, सूबेदार सुमेर सिंह, मुकेश श्योराण और पूजा भुक्कल सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता व संगठन प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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