अरावली पर हमला सीधे जनता की साँसों पर हमला है: गुरिंदरजीत सिंह

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कूड़े के पहाड़ों पर मौन, अरावली पर बुलडोज़र—बहुमत की सरकारों की असली प्राथमिकता उजागर

कूड़े के पहाड़ हटाने की बजाय अरावली मिटाने पर तुली सरकार, जनता सड़क पर उतरने को मजबूर

गुरुग्राम। अरावली पर्वत श्रृंखला को कमजोर करने की कोशिशों को लेकर गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने भाजपा सरकारों पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अरावली पर हमला केवल पर्यावरण पर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सेहत, भविष्य और जीवन के अधिकार पर सीधा हमला है।

गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम का बंधवाड़ी कूड़ा पहाड़ वर्षों से जहरीली गैसें उगल रहा है, लेकिन बहुमत की सरकारें आंख मूंदे बैठी हैं। कूड़े के पहाड़ हटाने में सरकारों की इच्छाशक्ति शून्य है, लेकिन अरावली को मिटाने में तेजी दिखाई जा रही है। यह सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करता है—जहां जनता की सेहत नहीं, बल्कि बिल्डर और खनन माफिया पहले हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात—जहां-जहां पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकारें हैं—वहां अरावली बचाने के नाम पर सन्नाटा है। न संसद में आवाज, न विधानसभा में सवाल, न सड़क पर संघर्ष। उन्होंने सवाल किया कि जब हर जगह भाजपा की सरकार है, तो फिर जिम्मेदारी किसकी है?

गुरिंदरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारें कॉरपोरेट और माफिया हितों के दबाव में प्राकृतिक सुरक्षा कवच को खत्म करने पर तुली हैं। अरावली पहाड़ियां ही दिल्ली-एनसीआर को रेगिस्तान बनने से रोकती हैं, भूजल को बचाती हैं और प्रदूषण को रोकने का काम करती हैं। इन्हें कमजोर करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है।

उन्होंने कहा कि बंधवाड़ी कूड़ा पहाड़ की वजह से गुरुग्राम पहले ही गैस चैंबर बनता जा रहा है। सांस लेना मुश्किल हो चुका है, बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। ऐसे में यदि अरावली भी खत्म की गई, तो गुरुग्राम की साँसें हमेशा के लिए घुट जाएंगी।

गुरिंदरजीत सिंह ने पर्यावरण मंत्री नरबीर सिंह के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब मंत्री स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि गुरुग्राम में रहने से जिंदगी के 10 साल कम हो जाते हैं, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि अरावली खत्म होने के बाद आम नागरिक कितने साल और खोएगा? क्या सरकार जनता की घटती उम्र की भी जिम्मेदारी लेगी?

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने तुरंत अरावली को संरक्षित क्षेत्र घोषित नहीं किया, अवैध खनन और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो जनता चुप नहीं बैठेगी। अब यह लड़ाई पर्यावरण की नहीं, जीवन और मृत्यु की लड़ाई बन चुकी है।

अंत में गुरिंदरजीत सिंह ने ऐलान किया कि यदि सरकार ने अपने फैसले वापस नहीं लिए, तो अरावली बचाओ आंदोलन को गुरुग्राम से दिल्ली और पूरे एनसीआर तक फैलाया जाएगा।
उन्होंने कहा, “जब सत्ता बहरी हो जाए, तो जनता को सड़कों पर उतरकर उसे सुनाना पड़ता है। अरावली हमारी धरोहर है और इसे बचाने के लिए हर नागरिक को खड़ा होना होगा।”

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Author: Bharat Sarathi

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