विपक्ष ने उठाए निजता पर सवाल, सरकार बोली– सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
नई दिल्ली, 4 दिसंबर 2025 – मोबाइल सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से लाए गए संचार साथी ऐप को लेकर केंद्र सरकार ने अपना बड़ा फैसला बदल दिया है। अब मोबाइल कंपनियों के लिए फोन में इस ऐप को पूर्व-इंस्टॉल रखना अनिवार्य नहीं होगा। सरकार ने यह निर्णय ऐप पर बढ़ते विवाद और नागरिकों की निजता संबंधी चिंताओं के बीच लिया है।
सरकार ने बताया कि संचार साथी ऐप अब पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा और लोग चाहें तो इसे डाउनलोड करें, चाहें तो न करें। यह फैसला उस आदेश को वापस लेने के बाद आया है जिसमें सभी नए स्मार्टफोन में ऐप को पहले से इंस्टॉल करने की शर्त लागू की गई थी।
सरकार की दलील– साइबर सुरक्षा में अहम भूमिका
दूरसंचार मंत्रालय का कहना है कि ऐप का उद्देश्य मोबाइल चोरी, फर्जी सिम और साइबर फ्रॉड के खिलाफ आम लोगों को तकनीकी सुरक्षा देना है। सरकार के अनुसार, ऐप को जबरन थोपने की जरूरत इसलिए नहीं रही क्योंकि इसे पहले ही लाखों उपयोगकर्ताओं ने स्वेच्छा से अपनाया है।
विपक्ष और विशेषज्ञों का हमला– “डिजिटल जासूसी का खतरा”
विपक्षी दलों, गोपनीयता कार्यकर्ताओं और टेक विशेषज्ञों ने इस ऐप को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई थीं। उनका कहना था कि फोन में जबरन कोई सरकारी ऐप डालना नागरिकों की निजता पर सीधा हमला है और यह डिजिटल निगरानी के दरवाज़े खोल सकता है।
बड़ी कंपनियों ने भी जताई असहमति
अंतरराष्ट्रीय मोबाइल निर्माताओं—विशेषकर एप्पल—ने भी इस अनिवार्यता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी और स्पष्ट कहा था कि वे बिना उपयोगकर्ता की सहमति सरकार-निर्मित ऐप प्री-इंस्टॉल नहीं कर सकते। इसके बाद सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े।
अब क्या बदलेगा?
- संचार साथी ऐप स्वैच्छिक रूप में उपलब्ध रहेगा
- फोन कंपनियों पर अब कोई अनिवार्यता नहीं
- उपयोगकर्ता चाहें तो डाउनलोड करें, न चाहें तो न करें
- प्राइवेसी बहस के बीच सरकार ने “जन भागीदारी मॉडल” को चुना
स्मार्ट सुरक्षा बनाम निजता की जंग
एक ओर सरकार साइबर अपराधों से बचाव को इस ऐप का सबसे बड़ा उद्देश्य मान रही है, वहीं विपक्ष और नागरिक संगठनों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर निगरानी स्वीकार्य नहीं हो सकती।
डिजिटल अधिकार की यह बहस आगे भी जारी रहने के आसार हैं — लेकिन फिलहाल राहत यह है कि नागरिकों पर कोई तकनीकी ज़बरदस्ती नहीं होगी।
संचार साथी ऐप से क्या फायदे?
- चोरी या खोया फोन IMEI के जरिए ब्लॉक कराया जा सकता है
- फर्जी सिम-कार्ड और धोखाधड़ी की पहचान में मदद
- किसी और के नाम पर चल रही अनधिकृत सिम की जानकारी
- फ्रॉड कॉल / अपराध के मामलों में पुलिस की मदद आसान
- साइबर सुरक्षा में जनभागीदारी बढ़ाने का माध्यम
(सरकार की आधिकारिक दलीलों के अनुसार)
निजता को लेकर क्या खतरे बताए गए?
- ऐप फोन के संवेदनशील डेटा तक पहुंच रख सकता है
- सरकारी निगरानी तंत्र के लिए डोर-ओपनर हो सकता है
- उपयोगकर्ता की सहमति के बिना प्री-इंस्टॉल होना निजता का उल्लंघन
- डेटा स्टोरेज और उपयोग पर पारदर्शिता नहीं
- लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप की आशंका
(विपक्ष और प्राइवेसी विशेषज्ञों के तर्क)







