गुरु तेग बहादुर जी मानवता की चादर : गुरिंदरजीत सिंह

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धार्मिक स्वतंत्रता के लिए गुरु जी की शहादत हमारे लिए मार्गदर्शक — समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह

गुरुग्राम। श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी शताब्दी पर गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने उन्हें शत्–शत् नमन करते हुए कहा कि गुरु जी ने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनकी शिक्षाएँ आज भी समाज को आपसी प्रेम, भाईचारे और सेवा का संदेश देती हैं।

गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि देश–प्रदेश में इस ऐतिहासिक अवसर पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ नानक नाम लेवा संगत सहित अन्य धर्मों के लोग भी गुरु जी की लासानी शहादत को स्मरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्थाओं के अनुसार पूजा-अर्चना करने का अधिकार देने के लिए प्राणों की आहुति दी।

उन्होंने इस अवसर पर सिख शहीदों भाई मती दास जी, भाई सती दास जी, भाई दयाला जी और दादा कुशाल सिंह दहिया जी की शहादत को भी नमन किया। उन्होंने बताया कि

  • भाई मती दास जी को आरे से चीरा गया,
  • भाई सती दास जी को रुई में लपेटकर आग के हवाले किया गया,
  • भाई दयाला जी को उबलती देग में बिठाकर शहीद किया गया।

वहीं, जब भाई जैता जी गुरु जी का पावन शीश आनंदपुर साहिब ले जा रहे थे, तब मुगल सिपाहियों से रक्षा करते हुए दादा कुशाल सिंह दहिया ने अपना शीश कुर्बान कर दिया। ये सभी शहादतें मानवता और धर्म की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए थीं।

गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम गुरु साहिब के सिद्धांतों पर चलें। भारत विभिन्न धर्मों का सुंदर देश है, सभी को एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हुए भाईचारे और सद्भाव से देश को आगे बढ़ाना चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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