हरियाणा से आए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को लेकर प्रदेश में जागी नई उम्मीदें

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– न्यायिक जवाबदेही, लंबित मामलों के निपटारे और आमजन की न्याय तक पहुंच में सुधार की संभावनाओं पर बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली/चंडीगढ़ – भारत के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जो मूल रूप से हरियाणा से हैं, के पदभार संभालने के बाद राज्य में न्यायिक व्यवस्था को लेकर नई उम्मीदों का माहौल बन गया है। हरियाणा के न्यायविदों, सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एक ऐसे न्यायाधीश का सर्वोच्च पद पर पहुँचना, जिसकी कार्यशैली स्पष्टवादिता और समयबद्ध न्याय पर आधारित है, निश्चित रूप से व्यापक सुधारों का संकेत देता है।

संक्षिप्त परिचय : जस्टिस सूर्यकांत

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म हरियाणा के हिसार में 10 फरवरी 1962 को हुआ। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने 1984 में वकालत शुरू की। 2004 में वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने, 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज, और 2025 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुँचने का उनका सफर न्यायपालिका में पारदर्शिता और समयबद्ध सुधारों की पहचान माना जाता है।

हरियाणा का गौरव बढ़ा – न्यायपालिका की नई दिशा पर उम्मीदें

जस्टिस सूर्यकांत का करियर हमेशा से आमजन के लिए समयबद्ध और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहा है। हरियाणा के विधि जगत से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि राज्य से आने वाला मुख्य न्यायाधीश देशभर की जमीनी समस्याओं को बेहतर समझता है।
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में लंबित मामलों की सुनवाई, निचली अदालतों की क्षमता वृद्धि और न्यायिक सुधारों में नई तेजी देखने को मिलेगी।

न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और तीव्रता की अपेक्षा

कानूनी जानकारों का मानना है कि नए CJI की प्राथमिकताओं में ई-कोर्ट प्रणाली, पेंडेंसी कम करना, और कमजोर वर्गों के मामलों की त्वरित सुनवाई प्रमुख रूप से शामिल रह सकती है।
हरियाणा के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत जैसे स्पष्ट सोच वाले न्यायाधीश का सर्वोच्च न्यायालय में नेतृत्व, न्यायिक प्रणाली में जनता के भरोसे को और मजबूत करेगा।

प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर भी असर की संभावना

हरियाणा में कानून व्यवस्था, भूमि विवादों और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले लंबे समय से चर्चा में हैं। ऐसे में प्रदेश के सामाजिक संगठनों का मानना है कि एक ऐसे मुख्य न्यायाधीश का शीर्ष पर होना, जो राज्य की समस्याओं और मानसिकता को निकट से समझते हों, न्यायिक मार्गदर्शन को और प्रभावी बना सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि न्यायपालिका की सक्रियता बढ़ने से शासन-प्रशासन में अधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का माहौल बन सकता है।

समाज में सकारात्मक संदेश

हरियाणा के युवाओं और कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भी जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनी है। प्रदेश के कई शिक्षण संस्थानों ने इसे ‘हरियाणा की प्रतिभा और मेहनत की पहचान’ बताया है।

अंत में

जस्टिस सूर्यकांत का हरियाणा से मुख्य न्यायाधीश बनने का सफर राज्य के लिए गर्व का विषय होने के साथ-साथ देश की न्यायपालिका के लिए नए बदलावों की उम्मीद भी लेकर आया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले समय में न्यायिक प्रणाली में कौन-से ठोस और दूरगामी सुधार सामने आते हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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