भारत सरकार की नई नेशनल शिक्षा नीति के तहत शतरंज की अंतरराष्ट्रीय चालों से किया अवगत – ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज

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ध्यान शक्ति व निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है शतरंज का खेल – शिक्षा के साथ-साथ युवा वर्ग शतरंज को भी बनाए जीवन का हिस्सा –

भिवानी, 12 फरवरी 2026 – भारत सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत स्थानीय हालु बाजार स्थित श्री महावीर जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आज विद्यार्थियों को शतरंज की बिसात पर अंतरराष्ट्रीय चालों की बारीकियां सिखाई गईं। विद्यालय परिसर में उस समय उत्साह का वातावरण बन गया जब पेरिस इंटरनेशनल ओलम्पिक से शतरंज एशिया महाद्वीप के महासचिव ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित किया।

विद्यालय पहुंचने पर स्कूल प्राचार्या पुष्पा देवी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नई नेशनल शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश के स्कूलों में ओलम्पिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शतरंज मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन और तार्किक क्षमता के विकास के लिए अत्यंत उपयोगी खेल है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ शतरंज जैसी बौद्धिक गतिविधियों को भी जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

अपने संबोधन में ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने कहा कि शतरंज केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मस्तिष्क की गहन कसरत है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित रणनीतियों और चालों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को विश्लेषणात्मक सोच, एकाग्रता और त्वरित निर्णय क्षमता विकसित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि शतरंज ध्यान शक्ति को सुदृढ़ करता है तथा निर्णय लेने की क्षमता को परिष्कृत करता है। यह खेल रणनीतिक सोच, धैर्य और मानसिक संतुलन को मजबूत करता है, जो किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए अनिवार्य गुण हैं। पेरिस इंटरनेशनल ओलम्पिक से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी मानसिक दृढ़ता और रणनीतिक तैयारी के आधार पर विजय प्राप्त करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने शतरंज की बिसात पर विभिन्न चालों का अभ्यास किया और खेल के प्रति अपनी गहरी रुचि प्रदर्शित की। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ टीचर उपस्थित रहे।

इस अवसर पर स्कूल प्राचार्या पुष्पा देवी ने ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय में ओलम्पिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए वे सदैव तत्पर रहते है।

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Author: Bharat Sarathi

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