गुरुग्राम: देश की राजधानी नई दिल्ली से सटे साइबर सिटी गुरुग्राम के हरयाणा इलाके में पार्कों और ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग अपनी ताकत के बल पर इन स्थानों का दुरुपयोग कर रहे हैं। कहीं पार्कों में पार्किंग हो रही है तो कहीं पशु पालन और यहां तक कि अवैध निर्माण भी किए जा रहे हैं।

समाजसेवी ने उठाई आवाज:

समाजसेवी गुरिंदरजीत सिंह ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “जिसकी लाठी उसकी भैंस” जैसी कहावत यहां चरितार्थ होती दिख रही है। गुरुग्राम के विभिन्न इलाकों में पार्कों और ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जों की भरमार है। इन कब्जों में पार्किंग, पशु पालन और अवैध निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। कुछ जगहों पर तो कमरे और दुकानें भी बना दी गई हैं, जिससे पार्क और ग्रीन बेल्ट की असली पहचान ही मिट गई है।

प्रशासन की उदासीनता:

सिंह ने कहा कि बीजेपी शासनकाल में ये समस्याएं और भी बढ़ गई हैं। प्रशासन की लापरवाही के कारण स्थानीय लोग अपनी मनमर्जी से इन जगहों पर अवैध कब्जे कर रहे हैं। सुशांत लोक की ग्रीन बेल्ट में दुकानों का निर्माण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। वहीं, सैक्टर 4 की धनवापुर रोड पर भी ग्रीन बेल्ट पर कब्जा कर लिया गया है।

पार्कों का बदलता स्वरूप:

न्यू कॉलोनी के जतिंद्र बहल पार्क में पेड़ काटकर टीन शेड लगाए गए, जहां एक निजी संस्थान द्वारा योग कराया जाता है। अन्य किसी गतिविधि के लिए इस पार्क का उपयोग नहीं हो रहा। इसी तरह, गुरु गोबिंद सिंह पार्क, न्यू कॉलोनी मोड़ पर पांच साल पहले साई मंदिर बना दिया गया। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित इन स्थानों पर धार्मिक आड़ में कब्जा जमाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों में रोष:

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और निष्क्रियता के कारण पार्क और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र कब्जाधारियों के हाथों में चले गए हैं। सुशांत लोक के एक निवासी ने बताया कि जब ग्रीन बेल्ट पर निर्माण कार्य चल रहा था, तो किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई, इसलिए अवैध निर्माण पूरा हो गया।

पुनर्निर्माण की मांग:

लोगों का कहना है कि पार्कों और ग्रीन बेल्ट की देखरेख न होने के कारण इनकी स्थिति दयनीय हो गई है। कई स्थानों पर पार्क की पहचान मिट चुकी है। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इन अवैध कब्जों को हटाकर पार्कों और ग्रीन बेल्ट का पुनर्निर्माण करवाए, ताकि हरियाली वापस लौट सके।

निष्कर्ष:

गुरुग्राम में पार्कों और ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जों का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए आरक्षित इन स्थानों पर अवैध निर्माण न केवल हरियाली को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि शहर की आबोहवा को भी प्रभावित कर रहा है। प्रशासन से उम्मीद है कि जल्द ही इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाए जाएंगे और इन जगहों को कब्जा मुक्त कर हरियाली लौटाई जाएगी।

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