चंडीगढ़,गुरुग्राम,रेवाड़ी – 31 मार्च 2025: स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि केन्द्र और हरियाणा में तीसरी बार सरकार बनाने के बाद भाजपा ने सत्ता और काले धन के बल पर देश-प्रदेश के मेन स्ट्रीम मीडिया पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है।

विद्रोही ने कहा कि भाजपा-संघ की विचारधारा और नीतियों का विरोध करने वालों के लिए अब प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कोई स्थान नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेन स्ट्रीम मीडिया भाजपा सरकार के प्रशस्ति गीत गाने में इतना व्यस्त हो गया है कि आम जनता के हितों और मुद्दों से उसका कोई लेना-देना नहीं रह गया है।

मीडिया पर सवाल:

विद्रोही का कहना है कि आज का मीडिया उन खबरों और कार्यक्रमों को महत्व नहीं देता जो भाजपा-संघ की विचारधारा के खिलाफ हों या भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और संविधान की मूल भावना के पक्ष में हों। उन्होंने कहा कि आम जन अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों के कंटेंट का विश्लेषण करके खुद यह देख सकते हैं।

विपक्ष के लिए जगह नहीं:

हरियाणा में भाजपा सरकार के तीसरी बार बनने के बाद मीडिया में विपक्ष की आवाज को दबा दिया गया है। विद्रोही ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ गिने-चुने नेताओं को छोड़कर किसी भी विपक्षी नेता या कार्यकर्ता की आवाज मीडिया में सुनाई नहीं देती। वहीं, भाजपा के तीसरे-चौथे दर्जे के नेताओं की अनर्गल बातों और संघी स्तुतिगान को प्रमुखता से परोसा जा रहा है।

सरकारी तंत्र और काले धन का दुरुपयोग:

विद्रोही ने कहा कि भाजपा सरकार मीडिया को अपने पक्ष में रखने के लिए सरकारी तंत्र और काले धन का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया कर्मियों को विज्ञापनों और अन्य साधनों से अपने पक्ष में करके उन्हें कठपुतली बना दिया गया है।

सोशल मीडिया के बढ़ते महत्व पर जोर:

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आम जनता को मुख्यधारा के मीडिया को दरकिनार करके वैकल्पिक सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर अधिक भरोसा करके भाजपा सरकार के कार्यों का मूल्यांकन करने की अपील की। विद्रोही का कहना है कि कथित मेन स्ट्रीम मीडिया को भाजपा-संघ का भांड मानते हुए उसकी राय और भ्रामक खबरों की उपेक्षा करनी चाहिए।

निष्कर्ष:

विद्रोही के इस बयान ने न केवल मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं बल्कि आम जनता को वैकल्पिक मीडिया का सहारा लेने का सुझाव भी दिया है। अब देखना यह है कि भाजपा सरकार और मीडिया जगत इस आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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