महिला दिवस पर कवियों ने बिखेरे रंग ….. राष्ट्रीय कवि संगम, गुरुग्राम द्वारा भव्य आयोजन

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गुरुग्राम, 8 मार्च: राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वावधान में महिला दिवस के अवसर पर गुरुग्राम के माधव भवन में एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन में गुड़गाँव सहित बहादुरगढ़, गाज़ियाबाद, रेवाड़ी आदि स्थानों से ख्यातिलब्ध कवि एवं कवयित्रियाँ शामिल हुए और अपनी काव्य प्रस्तुतियों के विविध रंग बिखेरे। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन मोनिका शर्मा ने किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय भवन में आयोजित इस समारोह में संघ के वरिष्ठ कार्यकारी जगदीश ग्रोवर एवं अशोक दिवाकर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त दिलीप जी, मुकुल जी एवं भाजपा कार्यकारी धनराज जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।

नारी सशक्तिकरण पर केंद्रित विचार

कार्यक्रम में अशोक दिवाकर ने अपने वक्तव्य में बेटियों को ज्ञान, शक्ति एवं सुसंस्कारों से सुसज्जित करने पर बल दिया। प्रसिद्ध कवयित्री लाडो कटारिया ने अपने काव्य पाठ की शुरुआत एक विचारोत्तेजक प्रश्न से की कि “महिला दिवस की तरह पुरुष दिवस भी क्यों नहीं मनाया जाता?” उनकी इस प्रस्तुति ने श्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया। संपूर्ण कार्यक्रम में नारी सशक्तिकरण और फागुनी बयारों के रंग छाए रहे।

काव्य संध्या की प्रमुख झलकियाँ

काव्य संध्या में लगभग 15 प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने खूब तालियाँ बटोरीं। प्रमुख कवियों की रचनाओं की झलक निम्नलिखित रही:

  • डॉ. विजय नागपाल ‘नाविक’: “नारी को दे दीजिए, हिस्से का आकाश। नील गगन विचरण करे, दमके खिला पलाश॥”
  • त्रिलोक कौशिक: “तुम हो केवल अधिकार नहीं! तुम हो केवल यह प्यार नहीं! तुम हो तो मैं हूँ, वरना तो भटकूंगा मैं निस्सार कहीं।”
  • रेणु रतन मिश्रा: “मेरा सही‌ मान तो दिलाओ, नारी हूँ, मुझे नारायणी न बनाओ।”
  • रश्मि ममगाईं: “मान मर्यादा अगर जो भूल जाएं दुष्ट तब, कालिका का रूप धरकर दुष्ट का संहार हो।”
  • मोनिका शर्मा: “धरा अंबर से मिल जाए तो चाहत और बढ़ती है, जो सोहबत रास आ जाए तो निस्बत और बढ़ती है।”
  • राजेश ‘रघुबर’: “निखर–निखरकर तन मन उजला होता है मधुमास में, साजन संग सजनिया नाचे फागुन के उल्लास में।”
  • कृष्ण गोपाल सोलंकी: “कभी कृष्ण तो राम लिखती है, कभी राधा तो श्याम लिखती है, यूँ छुपाकर ज़माने भर से वो, मेरा मेहंदी में नाम लिखती है।”
  • सुजीत कुमार: “पावै जो बेटी रहै महादुखों से दूर, घर में सुख समृद्धि हो, खुशियाँ हों भरपूर।”
  • विमल ग्रोवर: “जहाँ रहूं दुनिया में बस इतनी सी पहचान रहे, सर झुके सजदे में उसके, नेकी का अरमान रहे।”

समापन एवं धन्यवाद ज्ञापन

राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांतीय मंत्री विमल ग्रोवर ने कार्यक्रम की सफलता के लिए संघ के कार्यकारियों एवं उपस्थित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। भावपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत अल्पाहार के साथ इस साहित्यिक समारोह का समापन हुआ।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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