ताली बजाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है।शायद ऋषि-मुनियों को पता था केलोगों के पास व्यायाम का समय भी नहीं बचेगा
-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

ताली बजाने के उद्धत फायदे हैं – ताली मानवीय ऊर्जा और स्पंदन को उठाती है। ताली बजाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है, शायद ऋषि-मुनियों को यह पता था कि लोगों के पास व्यायाम का समय नहीं रहेगा, इसलिए ताली संस्कृति को अपनाया गया।
भारत की ताली गाथा
भारत के हजारों वर्षों के इतिहास में हमें हर समय अंतराल में अनमोल गाथाएं मिलती हैं, जो बताती हैं कि भारत को सोने की चिड़ीया क्यों कहा जाता था। यहाँ की संस्कृति और सभ्यता वैश्विक स्तर पर लुभावनी और आकर्षक रही हैं। यह संस्कृति अंग्रेजों की बुरी नजरों का शिकार हुई और इस सोने की चिड़ीया को गुलाम बनाकर अनमोल संसाधनों का दोहन किया गया।
हालांकि गाथाओं का कोई अंत नहीं है, पर आज हम भारत की ताली गाथा पर चर्चा करेंगे। ताली बजाने के उद्दात फायदे हैं, जो मानवीय ऊर्जा और स्पंदन को उठाते हैं। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और शायद ऋषि-मुनियों को यह एहसास था कि लोगों के पास व्यायाम करने का समय नहीं होगा, इसलिए ताली बजाने की परंपरा की शुरुआत की गई।
ताली क्या है?
ताली उस ध्वनि को कहते हैं जो दो सपाट सतहों के आपस में टकराने से उत्पन्न होती है, जैसे मनुष्यों या जानवरों के अंगों में। मनुष्य अपने हाथ की हथेलियों से ताली बजाता है, जिसे प्रायः प्रशंसा या अनुमोदन की अभिव्यक्ति के रूप में बजाया जाता है। कभी-कभी ताली लय के साथ भी बजाई जाती है, जिससे यह संगीत और नृत्य के स्वर से मेल खाती है। कुछ जानवरों में भी ताली बजाने की क्षमता पाई जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ताली बजाना एक व्यायाम

ताली बजाना एक प्रकार का व्यायाम है। जब हम ताली बजाते हैं, तो हमारे शरीर में खिंचाव होता है, और शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं। जोर से ताली बजाने पर कुछ ही देर में पसीना आने लगता है और पूरे शरीर में उत्तेजना का अनुभव होता है। यही व्यायाम का एक रूप है। हथेलियों में शरीर के अन्य अंगों की नसों के बिंदु होते हैं जिन्हें ‘एक्यूप्रेशर बिंदु’ कहा जाता है। ताली बजाने से इन बिंदुओं पर दबाव पड़ता है और रक्त संचार में वृद्धि होती है, जिससे अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है। एक्यूप्रेशर पद्धति में ताली बजाना अत्यधिक लाभकारी माना गया है।
निराशा से उबरने के लिए ताली बजाने की थेरेपी
ताली बजाना केवल एक व्यायाम ही नहीं, बल्कि निराशा से उबरने की एक प्रभावी थेरेपी भी है। अगर कोई व्यक्ति पाचन की समस्या से गुजर रहा है, तो उसे ताली बजाने की थेरेपी अपनानी चाहिए। यह हृदय और फेफड़ों की समस्याओं, अस्थमा, गर्दन, पीठ, और जोड़ों के दर्द में आराम दिलाने में मदद करती है। बच्चों के लिए यह थेरेपी उनकी काम करने की क्षमता और बौद्धिक विकास को बढ़ाती है, जिससे उनका दिमाग तेज होता है।
ताली बजाने के लाभ
- हृदय और फेफड़ों के लिए लाभकारी – ताली बजाने से अस्थमा जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
- पीठ, गर्दन और जोड़ों के दर्द में आराम – ताली बजाने से इन दर्दों में कमी आती है।
- गठिया रोग से बचाव – ताली बजाने से गठिया जैसे रोगों से बचा जा सकता है।
- लो ब्लड प्रेशर – लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह एक सहायक उपचार है।
- पाचन समस्याओं का इलाज – ताली बजाने से पाचन तंत्र को बेहतर किया जा सकता है।
- बच्चों की कार्यक्षमता और पढ़ाई में सुधार – बच्चों को ताली बजाने से लिखाई में सुधार और स्पेलिंग की गलतियाँ कम होती हैं।
- मधुमेह, गठिया, उच्च रक्तचाप, डिप्रेशन आदि समस्याओं में मदद – ताली बजाने से इन समस्याओं में राहत मिलती है।
ताली बजाने का उपयोग सकारात्मकता के लिए
ताली बजाना उत्सव, प्रशंसा, प्रोत्साहन और मान्यता का प्रतीक होता है। पूजा के समय या खेलों में भी ताली बजाने की परंपरा है, जिससे सकारात्मक वातावरण बनता है और ऊर्जा में वृद्धि होती है।
ताली बजाने के ऐतिहासिक उदाहरण
भारत में ताली बजाने की परंपरा भजन, कीर्तन, मंत्रोपचार और आरती के समय मौजूद है। यह न केवल शारीरिक लाभ देती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करती है।
निष्कर्ष
ताली बजाना एक प्रभावी व्यायाम और थेरेपी है, जिसे हमारे ऋषि-मुनियों ने दूरदृष्टि से विकसित किया था। यह हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है और मानसिक स्थिति को भी बेहतर करता है। इसलिए, हमें रोजाना कुछ मिनटों के लिए ताली बजाने की आदत डालनी चाहिए, ताकि हम स्वस्थ रह सकें और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा महसूस कर सकें।
-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया








