हिसार, 3 मई। पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई ने मोहनलाल बडोली के नोटिस संबंधी बयान को सिरे से खारिज करते हुए उसे पूरी तरह हास्यास्पद बताया है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी की ओर से किसी को नोटिस जारी होना चाहिए, तो सबसे पहले रेखा शर्मा और उसके बाद मोहनलाल बडोली को होना चाहिए।
जारी बयान में बिश्नोई ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जब शिक्षक अच्छा होता है तो विद्यार्थी जल्दी सीख जाता है। कम से कम यह तो अच्छा हुआ कि मेरे दबाव के बाद मोहनलाल बडोली ने चौधरी भजनलाल का नाम सम्मान के साथ लेना सीख लिया।”
बडोली के “जैसा बाप, वैसा बेटा होना जरूरी नहीं” वाले बयान पर पलटवार करते हुए बिश्नोई ने कहा कि जिस पिता के बारे में एक महिला द्वारा अमर्यादित टिप्पणी की गई, उस पर कार्रवाई करने के बजाय बडोली चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि रेखा शर्मा को नोटिस क्यों नहीं भेजा गया, जबकि उन्होंने खुले मंच और बाद में इंटरव्यू में भी अपने बयान को दोहराया।
बिश्नोई ने कहा, “मैं वही बेटा हूं, जिसके पास खुद भाजपा के नेता गठबंधन के लिए आए थे। मैंने हरियाणा में आपको चलना सिखाया, तीन में से दो बार आपकी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई और राजस्थान में 27 में से 22 सीटों पर बढ़त दिलाई।”
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “जिस बेटे को आप आज चुनौती दे रहे हैं, वही आपको अर्श से फर्श पर लाने का दम रखता है। कागज के टुकड़ों वाले नोटिस से कुलदीप बिश्नोई डरने वाला नहीं है। मैं चौधरी भजनलाल का बेटा हूं और ऐसे नोटिसों की परवाह नहीं करता।”
अंत में बिश्नोई ने कहा कि मोहनलाल बडोली का बयान उनकी अपरिपक्वता को उजागर करता है। रेखा शर्मा के बयान को गलत न मानना और केवल शब्दों के चयन को मुद्दा बनाना उनके दोहरे मापदंड को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बडोली असल मुद्दे—चौधरी भजनलाल के अपमान—से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हरियाणा की जनता सब समझती है और समय आने पर जवाब देगी।








