पुरानी अनाज मंडी रेलवे और ब्रिज के नीचे भंडारा आयोजित

अनादि काल से चली आ रही धर्म-कर्म की परंपरा का किया निर्वहन

सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे और और देश की अखंडता की कामना

फतह सिंह उजाला 

पटौदी । भारतीय सनातन संस्कृति में अनादि काल से धर्म कर्म सहित दान करने की परंपरा चली आ रही है। कहा भी गया है व्यक्ति जैसा भी दान अपने जीवन में करता है वैसा ही पुण्य भी उसको प्राप्त होता है। भारतीय सनातन संस्कृति में निर्जला एकादशी का भी एक अपना ही विशेष महत्व है। निर्जला एकादशी के उपलक्ष पर सनातन प्रेमी श्रद्धालुओं के द्वारा विशाल भंडारा का आयोजन कर लोगों को प्रसाद छकाया गया। इस भंडारा का आयोजन पुरानी अनाज मंडी के रेलवे और ब्रिज के नीचे किया गया।

भंडारा आयोजन करने वाले बाबा श्री श्याम के भक्त और श्रद्धालु युवाओं का कहना है कि भारतीय सनातन संस्कृति में अनादि काल से दान- धर्म करने की परंपरा चली आ रही है । विशेष रूप से गर्मी के मौसम में जगह-जगह पर पीने के पानी की व्यवस्था की जाती है । प्याऊ भी लगाई जाती है और आवश्यकता के अनुसार पानी भरने के लिए मटके भी रखे जाते हैं । जिससे कि जरूरतमंद और प्यासे व्यक्ति अपनी प्यास पानी पीकर शांत कर सके। भंडारा का प्रसाद वितरण किया जाने से पहले युवाओं के द्वारा बाबा श्री श्याम बाबा , गौ प्रेमी बाबा हरदेवा का जय घोष किया गया।

धर्म प्रेमी युवाओं के द्वारा आयोजित इस भंडारे के विषय में बताया गया यह भंडारा समाज में आपसी भाईचारा सामाजिक एकता और देश की उन्नति की कामना लेकर किया गया है । समर्थ व्यक्ति को अपने समर्थ के मुताबिक दान धर्म अवश्य करना चाहिए। हमारा अपना आपस में सहयोग करके सामाजिक एकता को बनाए रखना भी इस प्रकार के आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा ही है । भंडारा में सभी धर्म वर्ग संप्रदाय के लोग प्रसाद ग्रहण करने के लिए पहुंचते हैं।