पूरी कांग्रेस की बजाए भूपेंद्र सिंह हुड्डा और यार नेता लड़ रहे हैं आदमपुर का उपचुनाव !

धर्मपाल वर्मा

चंडीगढ़ । निर्वाचन आयोग ने जब अचानक आदमपुर के उप चुनाव की घोषणा की तो बहुत लोग यह मानकर चल रहे थे कि जब मौजूदा सरकार में पहला उपचुनाव कांग्रेस के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ बरोदा में हुआ तो उसे श्री हुड्डा ने मतलब कांग्रेस ने जीता । दूसरा उपचुनाव अभय सिंह चौटाला के गढ़ ऐलनाबाद में हुआ उसे श्री चौटाला ने जीता अब चौ भजनलाल के गढ़ आदमपुर में उप चुनाव हो रहा है यहां भजन लाल का परिवार ही चुनाव जीतेगा।

कोई कुछ भी कहता रहे परंतु कोंग्रेस के नेता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके समर्थक इस विचार से सहमत नहीं है और उनका दावा है कि आदमपुर में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश जेपी ही चुनाव जीतेंगे। देखा जाए तो इस चुनाव को कोंग्रेस की बजाए भूपेंद्र सिंह हुड्डा एंड कंपनी मतलब चार नेता लड रहे हैं। मतलब भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उदय भान ,दीपेंद्र हुड्डा और जयप्रकाश जे पी । अभी इनके अलावा कोंग्रेस का कोई भी नेता चुनाव प्रचार में नजर नहीं आया है । जिन्हें स्टार प्रचारक बताया जा रहा है वे भी अधिसंख्य चुनाव से नदारद हैं ।

प्रदेश में पार्टी के चार कार्यकारी अध्यक्ष हैं चुनाव में दो दिन का समय बचा है इनमें से कोई भी चुनाव प्रचार में नहीं पहुंचा। कांग्रेस की नवगठित स्टीयरिंग कमेटी की सदस्य कुमारी शैलजा और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला नहीं आए न किरण चौधरी आई न कैप्टन अजय यादव दिखे न चंद्रमोहन। कुछ लोग तो यह कहने लगे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा दूसरे नेताओं को बुलाना ही नहीं चाहते और अपने दम पर ही जीत दर्ज करने के सपने देख रहे हैं।देखा जाए तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने चिर परिचित अंदाज में चुनाव लड रहे हैं और अब उन्होंने आदमपुर में ही डेरा डाल लिया है । आदमपुर में देखा जा रहा है कि प्रदेश के कोने-कोने से हुड्डा समर्थक कार्यकर्ता और नेता दल बल सहित चुनाव प्रचार में डटे हुए हैं और उनका 1 सूत्री कार्यक्रम यह बताने का है कि जयप्रकाश जीत रहे हैं भव्य बिश्नोई हार रहे हैं। वे एक तरह से माहौल बनाने में लगे हुए हैं। उनका प्रचार इस बात का भी है कि एक वर्ग विशेष बिश्नोई के खिलाफ और कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो रहा है।

कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता यह दावा करते भी देखे जा सकते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष उदय भान के कारण कांग्रेस प्रत्याशी को दलित मतदाताओं में भी विशेष तौर पर समर्थन मिल रहा है। वह कुलदीप बिश्नोई की कमजोरियों, उसकी अविश्वसनीयता उसकी झूठ और कई तरह के यू टर्न आदि जनता के समक्ष इस तरह से प्रस्तुत करते जा जा रहे हैं कि उन्हें इसका असर होता भी दिख रहा है। इस सिलसिले में कुलदीप बिश्नोई की वह वीडियो बड़ा काम कर रही है जिसमें वे 2014 के चुनाव के समय मंच से यह कह रहे हैं कि किसी पर भरोसा कर लेना परंतु भारतीय जनता पार्टी पर कभी मत करना। इस सिलसिले में कुलदीप बिश्नोई समर्थक जयप्रकाश जेपी की उस वीडियो को इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें गादडी और बागड़ी वाली बात कही जा रही है। यह दोनों वीडियोज अपना काम भी कर रही हैं।

कुलदीप बिश्नोई के परिवार की बात करें तो हिसार में वे हिसार लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं, नलवा से चौधरी भजन लाल की पत्नी जसमा देवी चुनाव हार चुकी हैं, चंद्रमोहन भी नलवा से हार चुके हैं। आदमपुर से विधानसभा का चुनाव नहीं हारे परंतु कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई लोकसभा चुनाव में आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से 23000 वोटों से हार चुके हैं ।ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि कुलदीप बिश्नोई के परिवार को आदमपुर में विधानसभा चुनाव में हराया नहीं जा सकता परंतु परिस्थितियों का आकलन करें और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की माने तो मौजूदा चुनाव में कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई की हार होती नजर नहीं आ रही है।

पहले बात कॉन्ग्रेस जेपी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कर लेते हैं। उनकी ओर से यह कहा जाता है कि 2009 में विधानसभा चुनाव में आदमपुर में कुलदीप बिश्नोई को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जयप्रकाश जेपी ने कड़ी टक्कर दी थी और जीत में केवल लगभग 6000 मतों का फर्क रहा था। इस मामले में आदमपुर हलके में भजनलाल परिवार के समर्थक याद दिलाते हैं कि उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री होते थे । वे एक योजना के तहत खुद जयप्रकाश जे पी को आदमपुर से चुनाव लड़ाने के लिए लाए थे। केंद्र में लगातार दूसरी बार कांग्रेस की सरकार बन चुकी थी और कुलदीप बिश्नोई सता में नहीं थे।

जयप्रकाश जेपी समर्थक दूसरा उदाहरण 2019 के लोकसभा चुनाव में भव्य बिश्नोई की आदमपुर में 23000 मतों की हार का देते हैं। इस मामले में जवाब आता है कि उस चुनाव में भी 2014 की तरह मोदी की लहर चल रही थी । भाजपा ने हरियाणा में 10 की 10 लोकसभा की सीटें जीती थी । उस चुनाव में आदमपुर में कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला था और आदमपुर के भजनलाल विरोधी सभी लोग एक जगह इकट्ठे हो गए थे । आदमपुर में यह समीकरण भी काम कर रहा था कि भाजपा का उम्मीदवार दीनबंधु सर छोटूराम का रक्त संबंधी ,सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, हरियाणा के दिग्गज नेता चौधरी बिरेंदर सिंह का पुत्र बृजेंद्र सिंह चुनाव लड़ रहा था। जनता ने सत्ता पर काबिज पार्टी को वोट दिए । भव्य बिश्नोई और कुलदीप बिश्नोई के लिए अब वह स्थिति नहीं है।

2019 में 6 महीने बाद इसी आदमपुर हलके में विधानसभा के चुनाव में कुलदीप बिश्नोई लगभग 30000 मतों के अंतर से जीते थे। मौजूदा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल और आम आदमी पार्टी के जो उम्मीदवार मैदान में हैं उनसे भी कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो रहा है ।इसके अलावा जिस समुदाय को कांग्रेस अपने बड़े वोट बैंक के रूप में देख रही है उससे अब भी भाजपा प्रत्याशी को वोट मिल रहे हैं ।जबकि भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए आदमपुर में कोई भी प्रमुख उम्मीदवार मैदान में नहीं है। इस वोट बैंक में कांग्रेस की स्थिति किसी तरह से भी मजबूत नजर नहीं आ रही है। यहां एक बात और गौर करने की यह है कि जननायक जनता पार्टी के नेताओं का प्रयास भी यह है कि उनके समर्थक कांग्रेस को वोट डालकर किसी तरह से भी उनके प्रतिद्वंदी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मजबूती प्रदान न करें ।उनकी यही सोच इंडियन नेशनल लोकदल को लेकर रहेगी। यहां यह भी समझा जा सकता है कि जेजेपी की प्राथमिकता अब कुलदीप बिश्नोई की बजाय अभय सिंह चौटाला और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दांत खट्टे करने की है। क्योंकि इन दोनों का वोट बैंक भी वही है जो जे जे पी का है। पिछले विधानसभा चुनाव में आदमपुर में जेजेपी के उम्मीदवार को 15000 वोट मिले थे । इस पक्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता । यदि इस वोट बैंक को चौधरी देवीलाल की विचारधारा से जोड़कर देखा जाए तो वह कांग्रेस विरोधी विचार का है और ऐसे मतदाता इंडियन नेशनल लोकदल को भी फेवर करेंगे तो इससे भी कांग्रेस उम्मीदवार को ही नुकसान होगा।

कांग्रेस समर्थक इस गलतफहमी में भी नजर आ रहे हैं कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उदय भान के कारण आदमपुर में कांग्रेस को दलित मतदाताओं का समर्थन भी प्राप्त हो सकता है परंतु व्यवहार में देखा जाए तो हिसार का दलित मतदाता उदय भान की बजाय कुमारी शैलजा को नेता मानता है और कुमारी शैलजा चुनाव प्रचार में कहीं नहीं है। इस मामले में कुलदीप बिश्नोई भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ा दलित विरोधी नेता बताने का काम इसी दृष्टिकोण से कर रहा है। आदमपुर के मतदाताओं ने राज का स्वाद लंबे समय तक चखा है। उनके जहन में भाजपा की सरकार के 2 साल के शेष कार्यकाल की बात भी अंत तक रहेगी ।लोग बिना मकसद के वोट नहीं डालते। आदमपुर के लोग अगले चुनाव में कुलदीप बिश्नोई को झटका देने की बात सोच सकते हैं परंतु वह इस समय इस तरह से भव्य बिश्नोई को चुनाव हराकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारेंगे, ऐसी संभावनाएं कम हैं।

देखा जाए तो हर चुनाव में मतदाता मतदान से एक-दो दिन पहले अंतिम राय बनाते हैं और भले बुरे पर विचार करते हैं। इसलिए यह माना जा रहा है कि सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहे आदमपुर क्षेत्र में मतदाता मौजूदा चुनाव में सत्ता पक्ष को ही चुनना चाहेंगे।

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