किसानों की मंडियों में बेची जा रही बाजरा व धान फसल का भुगतन 48 घंटों में करने का दमगज्जा तो मार रही है पर 48 घंटों में भुगतान होना तो दूर की कौडी है, एक सप्ताह में भी फसल का भुगतान किसानों के बैंक खातों में नही हो रहा है। विद्रोही
विशेष गिरदावरी न होने से राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पूरे अहीरवाल को खरीफ की नष्ट फसलों के मुआवजे से वंचित करने का षडयंत्र जब पहले ही रचा जा चुका है तो फिर उपमुख्यमंत्री किसानों को मुआवजा देने का जुमला उछालकर क्यों ठग रहे है? विद्रोही

13 अक्टूबर 2022 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के इस दावे को किसानों के साथ क्रूर मजाक बताया कि धान व बाजरा उपज का भुगतन 48 घंटों मेें हो रहा है और सरकार बाजरे को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद रही है। विद्रोही ने कहा कि भाजपा की संगत में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी लम्बी-लम्बी हांकने व जुमला उछालने में पारंगत होते जा रहे है। भाजपा-जजपा सरकार किसानों की मंडियों में बेची जा रही बाजरा व धान फसल का भुगतन 48 घंटों में करने का दमगज्जा तो मार रही है पर 48 घंटों में भुगतान होना तो दूर की कौडी है, एक सप्ताह में भी फसल का भुगतान किसानों के बैंक खातों में नही हो रहा है। वहीं अहीरवाल में किसान बाजरा फसल को 2350 रूपये प्रति क्विंटल की बजाय 1600-1700 रूपये भाव में बेच रहा है। बाजरे की सरकारी खरीद करने की बजाय हरियाणा सरकार भावांतर योजना के तहत प्रति क्विंटल बाजरे पर 450 रूपये भरपाई राशि देने के बहाने एमएसपी पर बाजरा खरीदने से भाग रही है।।

विद्रोही ने कहा कि पिछले साल सरकार ने भावांतर योजना के तहत 500 रूपये प्रति क्विंटल देने का दावा किया था जो मुठ्ठीभर किसानों को ही मिला। पिछले साल की तुलना में यह राशी 500 रूपये से घटाकर 450 रूपये कर दी गई। वहीं पिछले वर्ष का अनुभव बताता है कि भावांतर योजना किसानों को ठगने का तरीका है। मंडियों में किसान का बाजरा व्यापारी औने-पौने दामों में लूट रहे है और सरकार एमएसपी पर खरीद करने की बजाय भावांतर का राग अलापकर किसान को लूट से बचाने की अपनी संवैद्यानिक जिम्मेदारी से भाग रही है। 

विद्रोही ने कहा कि इसी तरह उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि भारी वर्षा व जलभराव से नष्ट फसलों  का मुआवजा सरकार किसानों को दे रही है और उन्होंने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर नष्ट फसलों का ब्यौरा देने का किसानों को उपदेश झाडा। सवाल उठता है कि जब अहीरवाल में आज तक खेतों में जाकर नष्ट फसलों की विशेष गिरदावरी तक नही हुई है। ऐसे में यदि किसान अपनी नष्ट फसलों का ब्यौरा क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज भी करा देगा तो खेतों में फसल काटने व उठाने के चलते खेत खाली पड़े है और किसान सरसों की बिजाई की तैयारी में है। ऐसी स्थिति में यह कैसे तय होगा कि किसान की फसल कितनी नष्ट हुई है क्योंकि अहीरवाल में तो राजस्व विभाग सरकार को भारी वर्षा व जलभराव से केवल 10-20 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट भेज चुका है जिसके अनुसार इस क्षेत्र के किसानों को एक रूपया भी मुआवजा नही मिलने वाला।

विशेष गिरदावरी न होने से राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पूरे अहीरवाल को खरीफ की नष्ट फसलों के मुआवजे से वंचित करने का षडयंत्र जब पहले ही रचा जा चुका है तो फिर उपमुख्यमंत्री किसानों को मुआवजा देने का जुमला उछालकर क्यों ठग रहे है? विद्रोही ने कहा कि इसीे तरह दुष्यंत चौटाला निजी उद्योगों व संस्थानों में हरियाणवी युवाओं को 75 प्रतिशत रोजगार देने का कानून बनाने के नाम पर विगत एक साल से ठग रहे है, पर इस कानून के तहत एक भी युवा तो न तो रोजगार मिला है और न ही मिलने की संभावना है। इसी तरह सडकों के संदर्भ में भी उपमुख्यमंत्री का दावा हास्यास्पद है। नेशनल व स्टेट हाईवे को छोड दे तो पूरे अहीरवाल में ग्रामीण सम्पर्क व सड़क मार्ग जर्जर है। कागजों में बेशक सडके चकाचक हो, लेकिन जमीन पर नही है। विद्रोही ने सवाल किया आखिर सडकों की मरम्मत का पैसा कौन खा गया? 

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