मेरा देश बदल रहा है और कितना बदलेगा ?

कमलेश भारतीय

नवांशहर से लेकर रायबरेली तक भला क्या कनेक्शन हो सकता है ? कहां पंजाब में नवांशहर और कहां उत्तर प्रदेश में रायबरेली ? लेकिन पति अंगद सिंह सैनी नवांशहर से कांग्रेस के विधायक थे तो पत्नी अदिति सिंह रायबरेली से विधायक थीं कांग्रेस की । फिर ऐसा क्या हुआ कि अदिति सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गयीं और कांग्रेस ने पंजाब में नवांशहर से पति अंगद सिंह सैनी का टिकट वापस ले लिया । यह कनेक्शन है राजनीति का । अब अदिति सिंह कह रही हैं कि प्रियंका गांधी बाड्रा उनके पति को मेरे खिलाफ बयान देने के लिए भड़का रही थीं और बयान न देने पर अंगद सिंह सैनी का टिकट कट गया ।

वैसे यह भी बता दूं कि नवांशहर में मेरी दिलचस्पी इसलिए कि यह मेरा शहर है और यहां मैंने अंगद सिंह सैनी के दादा दिलबाग सिंह सैनी को कांग्रेस टिकट पर लगातार जीतते देखा है सिवाय सन् 1977 के चुनाव में । यह जिला भी दिलबाग सिंह के सपने से ही बना । वे चौ भजनलाल की तरह एकछत्र राज करते थे नवांशहर पर । अंगद सिंह को भी प्यार व आशीर्वाद मिला दादा के नाम का । रायबरेली जो कांग्रेस का गढ़ रहा वहां से अदिति सिंह कांग्रेस की विधायक रही । फिर भी ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस का हाथ झटक कर कमल थाम लिया ?

दलबदल के डर से ही राहुल गांधी गोवा में कांग्रेस प्रत्याशियों को वफादारी की कसम दिलाने जा रहे हैं । यह नौबत आ गयी है । हरियाणा में वफादारी की कसम पानी के लोटे को पास रख कर खाई और दिलाई जाती है लेकिन अब यह भी अपना असर खो चुकी लगती है । पहले पश्चिमी बंगाल में बांड तक भरवाये गये थे । फिर कहां गया विचारधारा या पार्टी के प्रति समर्पण ?
इधर वरूण गांधी भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ते । एक इंटरव्यू में आज भी कहा कि आखिर भाजपा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री टेनी को संरक्षण देकर क्या साबित करना चाहती है ? लखीमपुर खीरी कांड में टेनी का बेटा ही मुख्य आरोपी है ।
राजनीति भी क्या चीज है ? कहां की बात कहां जाकर जुड़ जाती है । विश्वविद्यालयों के कैलेंडर पर से फोटोज तो हटाये गये हरियाणा में और सवाल उठाये जा रहे हैं उत्तर प्रदेश की जाट बहुल सीटों पर । इस तरह यह मुद्दा हरियाणा की सीमायें पार कर उत्तर प्रदेश में पहुंच गया है और नये कैलेंडर जल्द छ्प कर आने के वादे किये जा रहे हैं । वैसे तो राजस्थान के पाठ्यक्रम से नेहरू जी को भाजपा शासनकाल में विदाई दी गयी थी । अब महात्मा गांधी के प्रिय गीत को विदाई दे दी गयी है । कुछ शहरों के नाम फिर बदले गये हैं । यह देश बदल रहा है ।

-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी

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