वक्त

सब समय का खेला है। एक समय वो सब कुछ थे। अब वो सब से कुछ कुछ हो गए। पंजाब के सीएम पद से कैप्टन अमरिंदर की आखिरकार विदाई हो ही गई है। इसका सीधा सा मतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने अपनी चलाई है। अपनी मनवाई है। कैप्टन के बारे में ऐसा प्रचारित था कि न तो वो लोगों से मिलते हैं,ना विधायकों और मंत्रियों से और न ही वो हाईकमान की परवाह करते हैं। कांग्रेस हाईकमान इन दिनों बुरे दौर से गुजर रही है। कमजोर सी दिख रही है। बावजूद इसके पार्टी ने कैप्टन को हटाने का कठोर निर्णय लिया और उसको बड़ी आसानी से क्रियान्वित किया-करवाया। क्या इसका हरियाणा कांग्रेस या अन्य प्रदेशों के लिए संदेश छिपा है? इसका मतलब ये भी है कि कांग्रेस हाईकमान भले ही कितनी ही कमजोर हो जाए, वो चलाएगी अपनी ही। चाहे जो हो जाए, करेगी अपनी ही। दबाव के आगे हार नहीं मानेगी। ऐसे में हरियाणा कांग्रेस के बड़े क्षत्रपों में से एक भूपेंद्र सिंह हुडडा पार्टी हाईकमान के इस संदेसे के बाद क्या अपनी सियासी रणनीति में बदलाव करने पर विचार करेंगे? क्या वो अलग पार्टी बनाने की संभावना पर गौर करेंगे? या वो कांग्रेस के भीतर रह कर ही खुद को इतना सक्षम और समर्थ बनाएंगे कि उनकी बात सुनने-मानने को हाईकमान विवश हो जाए? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आने वाले में समय में समय देगा। समय को चुनौती देना-वक्त के काम पर टिप्पणी करना उचित नहीं। साहिर लुधियानवी ने वक्त पर कहा था:

वक्त से दिन और रात,वक्त से कल और आज
वक्त की हर शय (वस्तु) गुलाम,वक्त का हर शय पर राज
वक्त की गर्दिश से है चांद तारों का निजाम
वक्त की ठोकर में है क्या हकूमत क्या समाज,
आदमी को चाहिए वक्त से डरकर रहे
कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज

..फिर वही कहानी

हरियाणा में गुड़गामा की रेरा पीठ के लिए एक सदस्य की तैनाती के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार ने एक सदस्य का एक खाली पद भरने के लिए जो आवेदन मांगे थे, उसकी मियाद खत्म होने तक 43 महानुभावों ने इसके लिए एप्लाई किया था। जैसा कि होता है..होता आया है.. हमेशा की तरह इस दफा भी कुछ रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों ने इस पद पर आने के लिए अपनी पुण्य इच्छा का प्रकटीकरण किया है। इनमें हैं डा.एस.एस.फूलिया,सुप्रभा दहिया और अशोक सांगवान शामिल हैं। जल्द ही आईएएस की नौकरी से रिटायर होने जा रहे अशोक शर्मा ने भी आवेदन किया है। करनाल के जिला सैशन जज जगदीप जैन और पूर्व सैशन जज एम.एम.ढौंचक भी रेरा गुड़गामा के मेंबर बनने के चाहवान लोगों में है। रेरा का सदस्य चुनने का काम पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी के जिम्मे होता है। हमारी तो यही ईश्वर से प्रार्थना है कि ये कमेटी जल्द से जल्द रेरा के लिए एक सदस्य चुनने के काम को निपटा दे। इस हालात पर कहा जा सकता है:

सब को हो गई खबर शायद
सुर्ख होने को है शहर शायद
पलकें झुक कर जरा नहीं उठती
तेरे आने का है असर शायद

भूल सुधार

हरियाणा सरकार ने अफसरों के 15 सितंबर को तबादले किए तो एचएसवीपी मुख्यालय के प्रशासक प्रदीप कुमार को सिविल ऐविएशन का सलाहकार लगा दिया। प्रदीप कुमार के स्थान पर किसी अन्य अधिकारी के आदेश नहीं किए गए,इसलिए एचएसवीपी मुख्यालय के पद का खाली रह गया। इसके दो दिन बाद सरकार ने दो आईएएस अफसरों के तबादले के फिर से आदेश किए और प्रदीप कुमार को एचएसवीपी मुख्यालय का चार्ज वापिस सौंप कर भूल सुधार कर लिया।

मनोहारी लंच

हरियाणा सरकार ने कुछ एचसीएस अफसरों को बीडीपीओ के कनिष्ठ पद पर लगाया तो वो बिदक गए। बीडीपीओ का चार्ज नहीं संभाला। बाद में उनको डिप्टी सीईओ जिला परिषद का भी झुनझुना थमा कर तसल्ली देने की कोशिश की गई। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने वर्ष 2020 बैच के इन एचसीएस अफसरों को शनिवार को लंच पर निमंत्रित किया। उन्होंने ने इनको ज्ञान दिया कि कोई पद छोटा या बड़ा नहीं होता। ये सब मन का वहम है। सब पद एक जैसे होते हैं। सब काम महत्वपूर्ण होते हैं। पहले तो आईएएस अफसरों को भी शुरू शुरू में बीडीपीओ के पद पर लगाया जाता था। फील्ड में काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रामीण विकास के काम को आगे बढाना पुण्य का काम है। महात्मा गांधी ने भी कहा है कि असली भारत तो गांव में बसता है। सो बीडीपीओ का पद छोटा नहीं है। इसमें बड़ी जिम्मेदारी है। जुट जाओ। गांडीव उठाओ। राष्ट्र निर्माण का फर्ज निभाओ।

सुझाव

एम तरफ आईएएस अफसर अपने आप को काफी होनहार समझते हैं और दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जिनको लगता है कि ये कौम सरकारी कामों में बिना बात की अड़चन लगाती हैं। हरियाणा के कई नगर निगमों के मेयर मुख्यमंत्री मनोहरलाल से चंडीगढ में रूबरू हुए। इस मीटिंग में एक मेयर ने कह दिया कि मेयर की पावर बढाओ। सारा रौला पावर का ही रहता है। दस करोड़ तक खर्च करने-मंजूर करने की पावर दो। ये भी कहा कि नगर निगमों में आईएएस को कमिशनर लगाने की बजाय एचसीएस अफसरों को लगाया जाए। आईएएस अफसर तो घमंडी होते है। एचसीएस अफसर नगर निगम के लिए ज्यादा उपयोगी साबित होंगे।

अब इन मेयर को ये कौन समझाएं कि घमंड तो एक मनोदशा होती है। घमंडी आदमी एक तरह का मनोरोगी होता है। मनोरोगी कोई भी हो सकता है। इसका आईएएस की अफसरी से कुछ लेना देना नहीं होता। घमंडी तो नेता भी हो सकता है,पत्रकार भी और चपरासी भी। ऐसे में यंू इन आईएएस अफसरों पर बिना बात की तोहमत लगाना उचित नहीं है। बहोत से आईएएस अफसर वाकई में कमाल के होते हैं। काबिल होते हैं और जमीन से जुड़े भी होते हैं। यहां जमीन से जुड़ने का मतलब प्रोपर्टी डीलिंग करना नहीं,बल्कि जमीन से जुड़ने का मतलब सादा जीवन-उच्च विचार है।

न्यायिक जांच

करनाल में किसानों पर पुलिसिया लाठीचार्ज और इस से जुड़ी अन्य घटनाओं की हरियाणा सरकार न्यायिक जांच करवाएगी। हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में ये जांच करवाई जाएगी। ऐसा बताया गया है कि ये जांच महज एक महीने की संक्षिप्त अवधि में पूरी कर ली जाएगी। जब घटना इतनी विशाल और विराट हो तो क्या उसकी जांच सिर्फ एक महीने में निपटाई जा सकती है? अभी तक तो ऐसा न तो सुना गया और न ही देखा गया। आमतौर पर जो देखा और महसूस किया गया है वो ये है कि ये जो जांच आयोग एक दफा बैठ जाते हैं, तो फिर ये उठते नहीं,इनको हाथ पकड़ कर उठाना पड़ता है। कई दफा तो ऐसा भी होता है कि इन आयोगों का गठन करने वाली सरकार ही चली जाती है-विदा हो जाती हैं,लेकिन ये यंू के यंू मजबूती से बने रहते हैं-टिके रहते हैं। सरकारी सुविधाओं को भोगते रहते हैं। अब देखना है कि करनाल की घटना की जांच के लिए हाईकोर्ट के किस रिटायर्ड जज का नंबर लगता है? किसकी किस्मत जोर मारती है?

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