उमेश जोशी

डूबते को तिनके का सहारा! इस कहावत को हाल में चरितार्थ होते देखा है। बीजेपी किसान आंदोलन के बाद लगातार हताशा में डूब रही है; बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। हिसार और टोहाना की घटनाओं से बीजेपी की हताशा और बढ़ गई है। बीजेपी ज्यों ज्यों दवा करती है त्यों त्यों मर्ज बढ़ता जा रहा है। हताशा औेर निराशा के गहरे भँवर फंसी बीजेपी और सत्ता में साझीदार जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) को भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है इसलिए बीजेपी तिनके का सहारा लेकर किनारे पर पहुंचने की कोशिश कर रही है।   

बीजेपी ने सम्भावनाओं के सभी रास्ते बंद देख कर फिर गुरमीत राम रहीम की शरण ली है। बीजेपी इसी तिनके का सहारा लेकर डूबने से बचने की कोशिश कर रही है

रोहतक की सुनारिया जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम के साथ हाल में सरकार की ओर बरती नरमी कई सवाल खड़े करती है। इलाज के लिए गुरमीत राम रहीम को पीजीआई रोहतक ले जाना, बाद में टेस्ट सुविधाओं के अभाव की दलील देकर गुरुग्राम के मेदांता में दाखिल कराना, अटेंडेंट के तौर पर हनी प्रीत को इजाजत देना आदि प्रशासनिक फैसले सरकार का नर्म रुख साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। गुरमीत राम रहीम का इलाज उसी मेदांता में करवाया गया है जहाँ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और गृहमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज इलाज हुआ था। इस घटनाक्रम ने गुरमीत राम रहीम के स्तर और रुतबे का एहसास करा दिया है। साथ ही, सरकार बार बार यह साबित कर रही है कि राज्य में सर्वोच्च प्रतिष्ठा वाले सरकारी अस्पताल बेकार है; उनमें कोई सुविधा नहीं है।  

गुरमीत राम रहीम को वीआईपी इलाज देने के पीछे पहली नज़र में दो कारण  सामने आते हैं। पहला, बीजेपी जनता का ध्यान जरूरी मुद्दों से हटा कर राम रहीम की ओर खींचना चाहती है। राम रहीम जैसे मसले छेड़ दो। जनता का ध्यान जरूरी मुद्दों से हट जाएगा और डेरा प्रेमी भी खुश हो जाएंगे। डेरा प्रेमियों के दिमाग में यह बात बैठा दी जाएगी कि बीजेपी की सरकार तो ढिलाई देना चाहती है, लेकिन इस ढिलाई का विरोध हो जाता है। ऐसी मानसिकता से डेरा प्रेमियों का बीजेपी के प्रति सॉफ्ट कार्नर बनेगा जिसका लाभ भविष्य में होने वाले चुनावों में लिया जा सकेगा। अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होंगे। वहाँ डेरा प्रेमियों की खासी संख्या है, खासतौर से अधिकतर मजहबी सिख डेरा प्रेमी हैं। उनके वोट लेने के लिए राम रहीम की सेवा करना जरूरी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी डेरा प्रेमियों की काफी संख्या है। अगले साल उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राम रहीम सिंह की सेवा फलदायी साबित हो सकती है।

दूसरा मुख्य कारण यह है कि किसान आन्दोलन के बाद खट्टर सरकार की छवि लगातार धूमिल हो रही है। इसे और ज्यादा धूमिल होने से बचाने ऐसी फिल्लर खबरों का सहारा लिया जा रहा है।  

किसान आंदोलन में सिखों की अधिक सक्रियता है और सिरसा का डेरा सच्चा सौदा सीधे सीधे गुरुद्वारे के विरुद्ध सत्ता के रूप में काम करता है। यदि किसान आंदोलन में कहीं डेरा प्रेमी सिख सक्रिय हैं तो राम रहीम सिंह से प्रेम प्रदर्शन कर डेरा प्रेमी सिखों को किसान आंदोलन से अलग करने की कोशिश की जाएगी।

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड और साध्वी बलात्कार मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सुनारिया जेल से बार-बार पैरोल और मेडिकल लीव जैसी छूट दिए जाने पर अंशुल छत्रपति ने जेल प्रशासन और हरियाणा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक याचना पत्र लिखा है जिसमें गुजारिश की गई है कि वे इस मामले में पहले की तरह दखल कर हरियाणा सरकार और प्रशासन से जवाब तलबी करें और अगस्त 2017 में सीबीआई अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के दौरान यह साबित हो गया था कि डेरा प्रमुख के इशारे पर पूरे हरियाणा व उत्तर भारत में हिंसा फैलाने की साजिश रची गई थी और उसके बाद पैदा हुए हालात कंट्रोल करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय को दखल देना पड़ा था। उस हिंसा में 40 लोगों की जान चली गई थी और अरबों की संपत्ति तहस-नहस कर दी गई थी; मीडिया के बहुत सारे वाहनों और मीडिया हाउसेज की ओबी वैन को जलाकर राख कर दिया गया किया था। 

उक्त मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने कई महीनों तक लगातार सुनवाई की। हरियाणा सरकार और प्रशासन को नाकामी के लिए फटकार लगाई गई थी और इन दंगों के लिए डेरा सच्चा सौदा के साथ-साथ हरियाणा सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया था। अंशुल छत्रपति ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय की इस सारी एक्सरसाइज के कोई मायने नहीं रह जाएंगे यदि हरियाणा सरकार और प्रशासन दोबारा फिर से इस तरह की बदमाशी कर इस खतरनाक अपराधी को इसी तरीके से खुल्ला घुमाते रही और मां की बीमारी और उसके इलाज के बहाने कभी फार्म हाउस की सैर तो कभी फाइव स्टार हॉस्पिटल में इलाज करवाने की छूट दी गई तो वह दिन दूर नहीं जब अगस्त 2017 की तरह हिंसा और दंगों की फिर से पुनरावृति होगी। उन्होंने कहा कि पंचकूला दंगों के दौरान पुलिस के आला अधिकारियों ने बार बार मीडिया के सामने यह बात कबूली कि दंगे बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा थे जिसके सूत्रधार डेरा प्रमुख  गुरमीत राम रहीम के साथ साथ हनीप्रीत और डॉ आदित्य आदि थे।

अंशुल ने कहा है कि सरकार की शह पर फिर से मेदांता अस्पताल और मानेसर फार्म हाउस में इस तरह की साजिश रचे जाने का खेल जारी है जिस पर माननीय अदालत रोक लगाए और सरकार और प्रशासन से जवाब तलबी करें। इससे पूर्व डेरा प्रमुख की बहुत सी याचिकाएं सिरसा जिला प्रशासन और रोहतक जिला प्रशासन की ओर से यह कहकर खारिज की गई कि उसके बाहर आने से लॉ एंड ऑर्डर की समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि आज भी समस्या जस की तस है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को किसी भी बहाने से  जेल से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए ताकि प्रदेश का अमन-चैन फिर से खराब ना हो और माननीय अदालत डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को इलाज के बहाने मेदांता अस्पताल में रखे जाने वाले वार्ड की सीसीटीवी की मॉनिटरिंग करें। 

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