किसानों ने कहा- सरकार एफसीआई को दे पूरा बजट

चरखी दादरी/भिवानी जयवीर फोगाट

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भिवानी और दादरी जिले की विभिन्न खापों, किसान, मजदूर,  सामाजिक, व्यापारी और कर्मचारी संगठनों ने आज यहां एफसीआई दफ्तर का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री को संबोधित ज्ञापन मैनेजर सुमित कौशिक को सौंपा। सुबह 10 बजे से किसान एफसीआई कार्यालय परिसर में एकत्रित होना शुरू हो गए थे। सबसे पहले उन्होंने छतीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के हमले में शहीद 23 जवानों को 2 मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि अर्पित की। इस बाद किसान एफसीआई दफ्तर का घेराव करते हुए धरने पर बैठ गए जो शाम 3 बजे तक चला। धरने की अध्यक्षता नरसिंह डीपीई और मास्टर शेर सिंह ने संयुक्त रूप से की।                             

 किसानों ने केंद्रीय मंत्री को प्रेषित अपने ज्ञापन में कहा कि एफसीआई पर बड़ा संकट है और सरकार की मंशा इसको बंद कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की है। इसलिए हम आगाह करते हुए मांग रहे हैं कि एफसीआई को बड़ा बजट जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि गेहूं पर खरीद के लिए जमाबंदी जमा कराने का फैसला सरकार को अविलंब वापिस लेनी चाहिए और फसल का भुगतान काश्तकार को करना चाहिए। उन्होंने सीधे बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि इससे  कई जटिल समस्याएं पैदा हो सकती है।                   

उन्होंने कहा कि निर्धारित समर्थन मूल्य से कम पर फसल खरीदने वाले के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खरीद केंद्रों को बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लाखों करोड़ों लोगों के लिए भोजन का स्त्रोत एफसीआई के माध्यम से पीडीएस सिस्टम है। इसलिए सरकार द्वारा भंडारण जारी रखना चाहिए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के मुंह से निवाला ना छीने। उन्होंने फसल खरीद में तेजी लाने का भी सुझाव दिया साथ में बारदाने और अन्य सुविधाओं को पूरा करने की बात रखी। उन्होंने एफसीआई के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हमारी मांगे नहीं मानी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 

  घेराव के दौरान मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। इस अवसर पर फौगाट खाप के प्रधान बलवन्त नंबरदार, बिजेंद्र बेरला, गंगाराम श्योराण, बाबा सदानंद सरस्वती, राजू मान, सुरेश गोयल, धर्मेन्द्र छपार, कमलेश भैरवी, मुकेश पहाड़ी, इंदु परमार, सत्यवान बलियाली, महिपाल आर्य, के.के. शर्मा, सूबे सिंह सरपंच, शमशेर फौगाट, प्रोफेसर राजेन्द्र डोहकी, रणधीर घिकाड़ा, जिले सिंह, दयानंद पूनियां, ठाकुर अमर सिंह, मास्टर रघुबीर श्योराण, सुनील एडवोकेट, परमजीत मड्डू, रिसाल कौर, रणधीर कुंगड़, अनिल शेषमा, सत्यवान पंघाल, ओमप्रकाश सैनी, महेंद्र मित्ताथल, पप्पू नंबरदार ने अपने विचार रखे।

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