हरियाणा की अफसरशाही

सरकार भले ही किसी पार्टी की हो और कोई हरियाणा में सीएम रहा हो,लेकिन एक तराना यहां बरोबर बजता ही रहता है। वो ये है कि सरकार में अफसरशाही हावी है और वर्करों की सुनवाई नहीं है। हरियाणा भाजपा के नवनियुक्त्त प्रभारी विनोद तावड़े के साथ दिल्ली में पार्टी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के साथ परिचयात्मक बैठक में कई नेताओं ने सरकार के खिलाफ तेवर दिखाए। इनको लगता है कि हरियाणा की भाजपा सरकार में अफसरशाही पर लगाम नहीं है और अफसर दब कर करप्शन कर रहे हैं। पैसा बना रहे हैं। आम आदमी और पार्टी वर्करों की सरकार में सुनवाई नहीं है। इत्तफाक से इस हमलावर टीम के अगुवा लगभग सारे लोग ऐसे हैं जिनका भाजपा से ज्यादा सा सरोकार नहीं हैं। ये मूल रूप से भाजपाई नहीं है। ये सब तो बहती गंगा में हाथ धोने के मकसद से ही भाजपा में आए हैं। ये सब आज इस डाल पर तो कल इस डाल पर-सियासी संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। आज भाजपा का ग्राफ शिखर पर है तो ये लोग भाजपा के साथ हैं और कल अगर कांग्रेस या किसी अन्य दल का ग्राफ उठे तो इनको उस दल का झंडा थामने में भी कतई हर्ज नहीं होगा। मनोहर सरकार के खिलाफ मुखरित नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह,केंद्रीय मंत्री व गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत,भिवानी महेंद्रगढ के सांसद धर्मबीर और सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक शामिल हैं। ऐसा माना जा सकता है कि अफसरशाही की आड़ में ये हमला मुख्यमंत्री मनोहरलाल के ऊपर ही किया गया है। बहराल जब तक मनोहरलाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद है तब तक उनको किसी किस्म का खतरा नहीं है। मतलब ये कि आने वाले समय में ये नेता कहते ही रहेंगे कि वर्करों की सुनवाई नहीं है। अफसरशाही हावी है। इन नेताओं के दिल के दर्द को समझते हुए कहा जा सकता है:

दूर से ही बस दरिया दरिया लगता है
डूब के देखो कितना प्यासा लगता है

फरीदाबाद नगर निगम

एक समय फरीदाबाद नगर निगम में काम करने का अवसर प्राप्त करने के लिए अफसर अधीर रहते थे। धीरे धीरे फरीदाबाद नगर निगम का जलवा कम होता गया और इसका स्थान गुड़गामा ने ले लिया। अब रही सही कसर फरीदाबाद नगर निगम के कमीशनर यश गर्ग ने पूरी कर दी है। उन्होंने अपने अधीनस्थ तैनात कई एचसीएस अफसरों की शक्त्तियां छीन कर इंजीनियरिंग विंग या अन्य अफसरों में वितरित कर दी हैं। इस से इन एचसीएस अफसरों में खासा रोष है। इनका मानना है कि वो भी जनसेवा की खातिर ही नौकरी में आए हैं। प्रचुर मात्रा में जनसेवा करने का प्रचुर अनुभव उनके पास भी है। ऐसे में उनके अनुभव का लाभ न उठाना जनहित में नहीं है। सरकार के हित में नहीं है।

किसान आंदोलन

क्या किसान आंदोलन को राजनीतिक पार्टियां प्रायोजित कर रही हैं? अगर सीधे तौर पर विपक्षी पार्टियां इस किसान आंदोलन में खुल कर हिस्सा नहीं भी ले रहीं हो तो भी उनको ये तो रास आता ही है कि अगर इस आंदोलन की आड़ में भाजपा सरकार की किरकिरी हो तो होती रहे। इस किसान आंदोलन को लेकर अलग अलग सरकारों का अलग अलग रवैया है। कांग्रेस की सरकार वाले सूबे पंजाब से किसान दिल्ली कूच के लिए निकले। वो तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। भाजपा की सरकार वाले हरियाण में इन आंदोलनरत किसानों को दिल्ली न पहुंचने देने के लिए हर मुमकिन कोशिश की गई। पुलिस ने किसानों पर ठंडे पानी की फुहारें छोड़ी गई। रास्तों में अवरोध खड़े किए गए। उसके बावजूद ये किसान दिल्ली सीमा तक जा पहुंचे। इस आंदोलन में अब हरियाणा और यूपी के कुछ किसान भी शामिल होने लगे हैं। पहले केंद्र सरकार ने इन किसानों के दिल्ली में धरना प्रदर्शन देने पर रोक लगा दी। दिल्ली में घुसने न देने के लिए सरहद पर पुलिस बैठा दी। उसके बाद इनको धरने के लिए दिल्ली के बुराड़ी में जगह मुहैया करवा दी। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार इन किसानों के लिए बुराड़ी मैदान में साफ सफाई, पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के इंतजाम में जुटी हुई है। पहले किसान दिल्ली में जाने की इजाजत मांग रहे थे और जब इनको जब दिल्ली में धरने की इजाजत मिल गई तो ये हरियाणा-दिल्ली बार्डर पर डट गए हैं। आखिर ये किसान चाहते क्या हैं? कौन है जो इनको धरनास्थल जाने से रोक रहा है? बेहतर होगा कि किसान अपने इस आंदोलन को अपने लक्ष्य से भटकने न दें। इसे किसी सियासी हाथ का खिलौना बनने न दें। एकजुट रहें। फूट न पड़ने दें। इस आंदोलन की आड़ में कोई ऐसा काम न करें-न करनें दे जिस से किसानों की बदनामी हो जाए। एक वर्ग इस ताक में है कि ऐसा कुछ हो जाए-करा-करवाया जाए जिस से इन आंदोलनकारियों को करारा सबक मिल सके। संभल कर रहें। सचेत रहें। होशियार रहें। इस हालात पर कहा जा सकता है:

कहां छुपा कर रख दंू मैं अपने हिस्से की शराफत
जिधर भी देखूं उधर बेईमान खड़े हैं
क्या खूब तरक्की कर रहा है अब देश देखिए
खेतों में बिल्डर,सड़क पर किसान खड़े हैं

एचसीएस एसोसिएशन

हरियाणा में सक्रेटरी आरटीए के पदों पर गैर एचसीएस अधिकारियों की तैनाती के खिलाफ एचसीएस एसोसिएशन ने अदालत में जाने की तैयारी की है। नान एचसीएस से पांच आईएएस बनाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के मामले में भी एचसीएस एसोसिएशन अदालत का दरवाजा खटखटाने जा रही है। बहुत से एचसीएस अफसरों को लगता था कि उनके इन दोनों मुददों पर मनोहर सरकार का उनकी मांगों के प्रति सकारात्मक रूख रहेगा। इस सिलसिले में सरकार में शीर्ष स्तर पर चिट्ठी पत्री और मेल मुलाकातों के सिलसिले भी चले। पर नतीजा मनमाफिक न मिलने से अब एसोसिएशन ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट की शरण में जाने की ठानी हैं।

अलविदा अहमद

कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल का निधन हो गया। पटेल का हरियाणा से गहरा नाता था। दरअसल भूपेंद्र सिंह हुड्डा को वर्ष 2005 में हरियाणा का सीएम बनाने में पटेल की जबरदस्त भूमिका थी। कई दफा रोहतक से सांसद रहे भूपेंद्र हुडडा के दिल्ली में अहमद पटेल पड़ौसी थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल की गिनती कांग्रेस के सर्वाधिक शक्तिशाली नेताओं में होती थी। ज्यादातर कांग्रेस विधायकों का तत्कालीन हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल को समर्थने होने के बावजूद वो सीएम नहीं बन सके थे। हुडडा को सीएम बनवा न कर पटेल ने यारों का यार होने का प्रमाण दिया। गांधी परिवार के बाद कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखने वाले पटेल ने यूं तो सत्ता को जमकर भोगा,लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि वो अत्यंत लोप्रोफाइल रहते थे। बिना हल्ला-गुल्ला किए और श्रेय लिए वो बड़े बड़े कारनामे कर देते थे-रच देते थे।

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