प्रदूषण बढ़ने की आशंका पर आयोग का फैसला; पहले दो चरणों के प्रतिबंध भी रहेंगे जारी
पाँचवीं तक की कक्षाओं में दूरस्थ पढ़ाई का विकल्प, जिले में 20 नवंबर तक आधे कर्मचारियों के घर से काम करने के निर्देश
गुरुग्राम, 6 नवंबर। बढ़ते वायु प्रदूषण और हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शुक्रवार को गुरुग्राम सहित पूरे दिल्ली–राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रैप का तीसरा चरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया। इसके साथ ही धूल फैलाने वाले निर्माण एवं तोड़फोड़ कार्यों तथा निर्धारित श्रेणी के पुराने वाहनों के संचालन पर कड़ी पाबंदियाँ लागू हो गई हैं। ग्रैप के पहले और दूसरे चरण के उपाय भी जारी रहेंगे।
आयोग की उपसमिति ने वायु गुणवत्ता की स्थिति की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया। इसका उद्देश्य प्रदूषण को और बढ़ने से रोकना है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण गुरुग्राम भी इन प्रतिबंधों के दायरे में है।
धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर रोक
तीसरे चरण के तहत मिट्टी की खुदाई, खाइयाँ खोदने, तोड़फोड़, सड़क निर्माण और बड़ी मरम्मत जैसे धूल पैदा करने वाले कार्यों पर रोक रहेगी। आवश्यक बुनियादी ढाँचे से संबंधित छूट प्राप्त परियोजनाओं में निर्धारित शर्तों के साथ काम जारी रह सकेगा। ऐसी परियोजनाओं को भी धूल नियंत्रण के नियमों का पालन करना होगा।
गुरुग्राम में बीएस–3 पेट्रोल तथा बीएस–4 और उससे पुराने मानक वाले डीजल हल्के चारपहिया वाहनों के संचालन पर भी प्रतिबंध लागू है। आयोग की सितंबर में संशोधित कार्ययोजना में गुरुग्राम को इन वाहन पाबंदियों वाले जिलों में शामिल किया गया है। इसलिए वाहन चालकों के लिए अपने वाहन का उत्सर्जन मानक जाँचना आवश्यक है।
पढ़ाई और कार्यालयों की व्यवस्था में भी बदलाव
ग्रैप–3 के प्रावधानों के अनुसार गुरुग्राम में पाँचवीं कक्षा तक विद्यालय में उपस्थित होकर पढ़ने के साथ इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना है, जहाँ यह सुविधा संभव हो। दूरस्थ माध्यम से पढ़ाई चुनने का निर्णय विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का होगा। इसे सभी विद्यालय पूरी तरह बंद करने का आदेश नहीं माना जाना चाहिए।
इस बीच गुरुग्राम जिला प्रशासन पहले ही 5 से 20 नवंबर तक सरकारी और निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति तथा शेष के घर से काम करने के निर्देश जारी कर चुका है। कार्यालयों को कर्मचारियों की बारीवार उपस्थिति का रिकॉर्ड रखना होगा। जिन औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं में यह व्यवस्था संभव नहीं है, उन्हें छूट दी गई है।
जिले में इसी अवधि के लिए धूल पैदा करने वाले बाहरी निर्माण एवं तोड़फोड़ कार्यों पर भी अलग से प्रतिबंध जारी किए गए हैं। इनके दायरे में सड़क, राजमार्ग, पुल और पाइपलाइन जैसी परियोजनाएँ भी शामिल हैं; छूट प्राप्त आवश्यक एवं राष्ट्रीय महत्त्व की परियोजनाओं को धूल नियंत्रण की शर्तें पूरी करनी होंगी। संबंधित विभागों और प्रवर्तन एजेंसियों को नियमित निरीक्षण कर अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।








