करनाल में नेताओं को हिरासत में लेने पर जताया रोष, कार्रवाई को बताया लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
नेताओं की रिहाई के बाद तय होगी आंदोलन की अगली रणनीति, विवादित प्रावधान वापस लेने की मांग
कुरुक्षेत्र, 5 नवंबर (प्रमोद कौशिक)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कुछ प्रावधानों का विरोध कर रहे सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने करनाल में समाज के नेताओं को पुलिस हिरासत में लिए जाने पर रोष जताया है। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने इन प्रावधानों को ‘काला कानून’ करार देते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई के बाद वरिष्ठ पदाधिकारी बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे।
क्षत्रिय सभा के संस्थापक महासचिव चंद्रपाल सिंह तंवर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने, शांतिपूर्ण बैठक करने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि करनाल स्थित राजपूत धर्मशाला में सवर्ण समाज के प्रतिनिधि आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे थे। इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे के मद्देनजर पुलिस ने विनोद राणा, मोहर सिंह राणा और सुरेंद्र प्रधान सहित करीब 25 से 30 नेताओं को हिरासत में ले लिया।
तंवर ने कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे लोगों को हिरासत में लेना अनुचित है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए।
प्रेस वार्ता में अन्य वक्ताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट रहने तथा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का आह्वान किया।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूजीसी के विवादित प्रावधानों को वापस लेने की मांग पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा। हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई के बाद वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में आगामी कार्यक्रमों पर निर्णय लिया जाएगा।








