हरियाणा सरकार के निर्देशों पर विद्युत विनियामक आयोग ने आगे की कार्रवाई रोकी; इलेवन पावर की सुनवाई की मांग भी खारिज

पंचकूला, 28 अक्टूबर। गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली वितरण की अनुमति देने के मामले में फिलहाल आगे की प्रक्रिया रुक गई है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने 28 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा है कि राज्य सरकार के निर्देश प्रभावी रहने तक इस मामले में आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार ने पूरे प्रदेश में समानांतर बिजली वितरण की अनुज्ञप्ति देने अथवा उसे लागू करने से रोकने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने 19 अक्टूबर, 2026 के आदेश से इलेवन पावर को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में 25 वर्ष के लिए समानांतर बिजली वितरण की अनुज्ञप्ति देने की अनुमति दी थी। इन दोनों जिलों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम पहले से बिजली वितरण का कार्य कर रहा है।
कंपनी को अनुज्ञप्ति की शर्तें स्वीकार करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। इलेवन पावर ने 21 अक्टूबर को पत्र भेजकर अपनी स्वीकृति दे दी। इसके बाद 23 अक्टूबर को कंपनी ने आयोग को बताया कि वह अनुज्ञप्ति लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। कंपनी ने यह भी अनुरोध किया था कि संबंधित आदेश या अनुज्ञप्ति के संबंध में कोई कार्यवाही होने पर उसे अग्रिम सूचना और सुनवाई का अवसर दिया जाए।
सरकार ने उपभोक्ता हित और आर्थिक प्रभावों का दिया हवाला
इस बीच हरियाणा सरकार ने 26 अक्टूबर को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत आयोग को निर्देश जारी किए। इनमें प्रदेश में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण की अनुज्ञप्ति देने, उसे संचालन में लाने अथवा प्रभावी करने से मना किया गया। आदेश के साथ संलग्न ऊर्जा विभाग के पत्र के अनुसार ये निर्देश मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी हुए हैं।
सरकार के पत्र में अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं को चुनिंदा रूप से अपने साथ जोड़ने, विभिन्न उपभोक्ता वर्गों के बीच बिजली दरों में दी जाने वाली सहायता के संतुलन पर असर, मौजूदा बिजली खरीद प्रतिबद्धताओं और वितरण ढांचे के दोहराव जैसी चिंताओं का उल्लेख किया गया है। इससे मौजूदा वितरण निगम और उसके उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
पत्र में कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारी और पूरे निर्धारित क्षेत्र में सभी उपभोक्ताओं को सेवा उपलब्ध कराने की क्षमता को लेकर उठी आपत्तियों का भी उल्लेख है। सरकार ने कहा है कि अनुज्ञप्ति दिए जाने के बाद आम जनता, उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली निगमों के कर्मचारियों में आशंकाओं तथा आंदोलन की जानकारी मिली है।
सुनवाई की मांग पर आयोग ने क्या कहा
कंपनी की अग्रिम सूचना और सुनवाई की मांग खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि सरकार के निर्देश पूरे प्रदेश पर सामान्य रूप से लागू हैं। आयोग के अनुसार इन निर्देशों को प्रभावी करने के लिए उसके समक्ष कोई न्यायनिर्णयन शेष नहीं है और ऐसा कोई विवाद लंबित नहीं है, जिसमें कंपनी के अधिकारों का नए सिरे से निर्धारण किया जाना हो। इसलिए सुनवाई का अवसर देने का आधार नहीं बनता।
कार्यवाहक अध्यक्ष मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकार के निर्देश लागू रहने तक मामले में आगे नहीं बढ़ा जाएगा। आदेश में अनुज्ञप्ति को स्थायी रूप से रद्द करने की घोषणा नहीं की गई है।
संयुक्त कर्मचारी मोर्चा ने किया फैसले का स्वागत
संयुक्त कर्मचारी मोर्चा, बिजली निगम गुरुग्राम ने समानांतर बिजली वितरण की प्रक्रिया पर रोक के फैसले का स्वागत किया है। मोर्चे की ओर से जारी विज्ञप्ति में सर्कल सचिव अमरजीत जाखड़, सर्कल नंबर दो के सचिव दलवीर मोर, सुशील शर्मा, मुकेश भयाना, रविंद्र यादव तथा सुरेश रुहिल सहित अन्य कर्मचारी प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार के निर्देशों और उनके आधार पर विद्युत विनियामक आयोग द्वारा आगे की कार्रवाई रोकने के निर्णय का स्वागत किया।








