कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाने के बजाय अपने 12 साल के कार्यकाल का जवाब देने की मांग
चंडीगढ़/रेवाडी, 25 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की है कि वे पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाने के बजाय भाजपा के पिछले 12 वर्षों के शासन को लेकर विपक्ष और आमजन द्वारा उठाए जा रहे सवालों का तथ्यों के साथ जवाब दें। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की कमियां गिनाने से वर्तमान सरकार अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती।
विद्रोही ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश में पारदर्शिता, ईमानदारी और बिना पर्ची-खर्ची के सरकारी भर्तियां करने के दावे करते हैं, लेकिन इन भर्तियों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग पर जवाब नहीं देते। उन्होंने भाजपा शासनकाल में हुई सरकारी भर्तियों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग दोहराई।
पुरानी भर्तियों की जांच से कौन रोक रहा है?
विद्रोही ने मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस से उसके दस वर्षों के कार्यकाल की सरकारी भर्तियों पर श्वेत पत्र मांगने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश की सत्ता और सरकारी रिकॉर्ड वर्तमान सरकार के पास हैं, तो वह स्वयं कांग्रेस शासनकाल की भर्तियों का विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं करती?
उन्होंने सवाल किया कि यदि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान भर्तियों में भ्रष्टाचार या अनियमितताएं हुई थीं, तो उनकी जांच कराकर जिम्मेदार नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से सरकार को कौन रोक रहा है? विद्रोही ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के बजाय केवल बयानबाजी करके भाजपा इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
एचपीएससी की भर्तियों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
विद्रोही ने भाजपा शासनकाल में प्रथम और द्वितीय श्रेणी की सरकारी नौकरियों की भर्ती में भ्रष्टाचार तथा धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे और सिफारिश के आधार पर प्रदेश के बाहर के अभ्यर्थियों को नियुक्तियां देकर हरियाणा के युवाओं के अवसर प्रभावित किए गए।
उन्होंने मांग की कि हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के माध्यम से भाजपा शासनकाल में हुई सभी भर्तियों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों के नाम, पिता का नाम, सामाजिक श्रेणी, मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त करने के स्थान और मूल जन्मस्थान सहित संबंधित विवरण जारी करने की मांग रखी।
विद्रोही ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता और शुचिता के अपने दावों को प्रमाणित करने के लिए भर्तियों से जुड़े सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।








